| जलवायु परिवर्तन चुनौतियों से निपटने के लिये जन-जागरूकता जरूरी |
| मंत्री श्री आर्य ने जलवायु परिवर्तन पर किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ |
| अनुपपुर | 23-मार्च-2018 |
पर्यावरण मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य ने गत दिवस भोपाल में एप्को में मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर केन्द्रित पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी में भाग ले रहे देश-प्रदेश के 200 से अधिक विषय-विशेषज्ञ, शोधार्थी आदि से श्री आर्य ने जलवायु परिवर्तन के खतरों और बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की। श्री आर्य ने कहा कि जिस तरह से वैश्विक और देश के तापमान में बढ़ोत्तरी से जलवायु में बदलाव आ रहे हैं, उससे कृषि और आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। भावी पीढ़ी को इनसे बचाने के लिये पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन विषय का समावेश किया जाना चाहिये।
एप्को के महानिदेशक श्री अनुपम राजन ने कहा कि एप्को ईको-क्लब द्वारा विद्यार्थियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। तीन जिलों के 60 गाँव को स्मार्ट विलेज बनाने का काम किया जा रहा है। परम्परागत जल-स्रोतों और देशी नस्ल के पशुओं का संरक्षण कर रहा है। एप्को विषय-विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त अनुभवशाली लोगों को जोड़कर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज 25वाँ विश्व जल-दिवस है। नितांत आवश्यक है कि लोगों को पीने का साफ पानी मिले, जिससे जल-जनित बीमारियाँ न हों।
मध्यप्रदेश का एप्को केन्द्र देश में पहले स्थान पर
केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सलाहकार और जलवायु परिवर्तन मिशन के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. अखिलेश गुप्ता ने कहा कि एप्को का जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र देश के 22 केन्द्रों में प्रथम स्थान पर है। पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने हमेशा आगे बढ़ते हुए पहल की है। उन्होंने कहा कि पहले विश्व के तापमान में 100-200 सालों में मामूली परिवर्तन आता था, जिसमें वर्ष 1980 के बाद से काफी बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे समुद्र स्तर भी बढ़ा है। इसके लिये मानवीय गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं। हालांकि विश्व की तुलना में भारत में तापमान कम बढ़ा है और देश में मध्यप्रदेश में भी स्थिति उतनी विकट नहीं हुई है। मध्यप्रदेश में भी वर्षा कम हुई है पर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अब हल्की बारिश न होकर भारी बारिश हो जाती है, जिससे वर्षा औसत तो सामान्य हो जाता है, पर यह कृषि के अनुकूल नहीं है। पूरे देश में हीट वेव बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि तापमान के बदलाव को मद्देनजर रखते हुए तैयारी करें और विश्वविद्यालय मिलकर इस पर शोध करें। उन्होंने कहा कि आज देश में विश्व का सबसे तेज मौसम भविष्यवाणी करने वाला कम्प्यूटर है।पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उप कुलपति डॉ. रामप्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जैव-विविधता में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आयी है। संगोष्ठी शोधार्थियों के लिये एक अच्छा अवसर और मंच है। मंत्री श्री आर्य ने इस अवसर पर अकादमिक समिति द्वारा चयनित 145 से अधिक शोध-पत्रों की पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने एप्को द्वारा जलवायु परिवर्तन पर पीएचडी के लिये प्रारंभ किये गये फैलोशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और राशि प्रदान की। शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किये। संगोष्ठी का समापन 24 मार्च को होगा। |
Friday, March 23, 2018
जलवायु परिवर्तन चुनौतियों से निपटने के लिये जन-जागरूकता जरूरी
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