Friday, March 23, 2018

किसानों से खेतों में फसलों के अवशेष व नरवाई न जलाने की अपील -कलेक्टर श्री शर्मा

किसानों से खेतों में फसलों के अवशेष व नरवाई न जलाने की अपील -कलेक्टर श्री शर्मा 
 
अनुपपुर | 23-मार्च-2018
   
   कलेक्टर श्री अजय शर्मा ने बताया है कि किसानों द्वारा गेहूं कटने के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिए आत्मघाती कदम सिद्ध हो सकता है। नरवाई जलाने से अन्य खेतों, पशु बाड़े, खलीहान आदि में अग्नि दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ेता है। धुएं से उत्पन्न कार्बनडाई ऑक्साईड से वातावरण का तापमान बढता है और प्रदूषण में भी वृद्धि होती है, जिससे पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ता है। खेती की उर्वरा परत लगभग 6 इंच की ऊपरी सतह पर ही होती है इसमें तरह-तरह के खेती के लिए लाभदायक मित्र जीवाणु उपस्थित रहते हैं। नरवाई जलाने से यह नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान होता है।
   नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्र कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाए तो वे बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद बना सकते हैं। खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्कहेरो आदि की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जैवांश खाद्य की बचत की जा सकती है। सामान्य हार्वेस्टर से गेहूं कटवाने के स्थान पर स्ट्रारीपर एवं हार्वेस्टर्स का प्रयोग करें तो पशुओं के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बड़ने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।

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