Monday, March 19, 2018

भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर

भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर 
नदी नदी है हर नदी को हम गंगा व नर्मदा के रूप में देखें - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर नदी संरक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत है - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, दो दिवसीय नदी महोत्सव का आज हुआ समापन 
अनुपपुर | 18-मार्च-2018
 
   
    नर्मदा नदी एवं तवा नदी के संगम स्थल बान्द्राभान में 16 मार्च से आयोजित दो दिवसीय पंचम नदी महोत्सव का गत दिवस समापन हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं खनिज श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने उपस्थित लोगों के बीच स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे का स्मरण करते हुए कहा कि मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं जिन्होने नदी महोत्सव की शुरूआत की। श्री तोमर ने कहा कि प्रकृति का नियम है कि रिक्तता समय रहते भर जाती है किन्तु श्री दवे का व्यक्तित्व एवं कृतित्व ऐसा था कि उनकी भरपाई संभव नही है। श्री दवे एक कार्यकर्ता, चिंतक, नेता एवं स्वयंसेवक के रूप में आदर्श थे। श्री तोमर ने कहा कि मां नर्मदा की महिमा अपार है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है। हमारी संस्कृति में नदियों, पर्वतों, वृक्षों, जंगल, जमीन, जल की पूजा की जाती है। यह हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होने कहा कि नदी तो नदी है हमें हर नदी को गंगा एवं नर्मदा के रूप में देखना चाहिए। प्रकृति के द्वारा जो कुछ भी जीवात्मा को प्रदान किया गया है उसकी भी प्रकृति ने एक आचार सहिता बना रखी है। प्रकृति का दोहन करने की स्वतंत्रता तो प्रकृति ने हमें दी है किन्तु यदि हम प्रकृति का शोषण करेगे तो प्रकृति हमें इसका जवाब देगी। प्रकृति के संरक्षण की व्यवस्था मनुष्य को जन्म से ही दे दी जाती है। नदी महोत्सव जैसे आयोजन होते है जहां हम नदी संरक्षण के लिए चिंतन व विचार करते है। श्री तोमर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ऐसी योजना तैयार की जाए कि जो लोग नदी संरक्षण मे बाधक है व वृक्षो का दोहन करते है उन सब को सामाजिक चेतना का ज्ञान कराया जाए। उन्होने कहा कि नदी का दोहन नीति के अनुरूप हो तो नदी का स्वरूप बिगडेगा नहीं। उन्होने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि मां के वक्ष स्थल को काटा जाए तो बच्चे का जन्म नहीं होगा। वैसे ही यदि नदी से रेत निकाली जाए तो नदी सुरक्षित नहीं रहेगी और नदी समाप्त हो जाएगी। नदी समाप्त हो जाएगी तो हम सबका जीवन भी समाप्त हो जाएगा।
       श्री तोमर ने स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे का स्मरण करते हुए कहा कि ईश्वर यदि उन्हे लंबा अवसर देता तो वह नदी एवं वन के क्षेत्र में सफलता पूर्वक कार्य कर दिखाते। उन्होने कहा कि हमारी संस्कृति में हमेशा से ही कर्म, विचार व गुण की पूजा हुई है। यदि हम विचार करे तो यह ध्यान आता है कि जब हम भगवान राम को राजा दशरथ के पुत्र के रूप में देखते है तो उनका स्मरण राजकुमार राम के रूप में करते है किन्तु जब वो 14 वर्ष के वनवास के दौरान अपने सामाजिक दायित्व को पूरा करते व मर्यादा की रक्षा करते है तो हम उन्हे भगवान श्रीराम कहकर उनकी पूजा करते है। उन्होने कहा कि स्वर्गीय दवे ने सहायक नदियो के बारे में भी विचार किया और कार्य किया। हम उनके अभियान को आगे बढाने का प्रयास कर रहे है। उनकी समग्र सोच यदि नदी संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करती है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है।
        समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए म.प्र.विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने कहा कि नदी संरक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत है। बचपन से हम यह सुनते आ रहे है कि नर्मदा मां नर्मदा है। भारत की संस्कृति में नदी संरक्षण, वृक्षों की पूजा धर्म थी किन्तु वृक्ष कटने लगे तो हमारे धार्मिक कार्य का विनाश हुआ और अब चिंता हो रही है कि हम इसे कैसे बचाएं। आदिगुरू शंकराचार्य ने मां नर्मदा को जीवित इकाई मानते हुए मां के रूप में उसकी स्तुति की। इसी को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित कर मां नर्मदा को जीवित इकाई की श्रेणी में माना गया है। डॉ शर्मा ने कहा कि मां नर्मदा की महिमा को प्रतिपादित करने के लिए आदिगुरू शंकराचार्य ने नर्मदा अष्टक लिखा, वहीं कवि पदमाकर ने गंगा लहरी लिखी। मां नर्मदा भगवान के चरणों से आई है आज हम मां नर्मदा की अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने  के लिए निकल पडे है। भारतीय संस्कृति में सहायक नदियों का महत्व भी बताया गया है और संगम को भी महत्व दिया गया है। गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम स्थल प्रयागराज का भी महत्व है। डॉ शर्मा ने कहा कि हम सहायक नदियो को भी जोडने का प्रयास करें।
    इसके पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा व अन्य अतिथियों को स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे द्वारा लिखित पुस्तक एवं छिंदवाडा में बनी उत्तरीय भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध फोटोग्राफर श्री मुकुल यादव के द्वारा मां नर्मदा के उद्गम स्थल से लेकर यात्रा तक के जीवंत फोटो के कैलेन्डर को विमोचन किया गया। बताया गया कि दो दिवसीय नदी महोत्सव में आये गये सुझाव को एक साराश एवं स्मारिका में प्रकाशित किया जाएगा।
    समापन अवसर को संबोधित करते हुए सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पंचम नदी महोत्सव सही मायने में आने वाले समय में हमारी पीढियों को मार्ग दिखाने का कार्य करेगी। उन्होने कहा कि मेरी नर्मदा आयोजन में सहभागिता स्वर्गीय अनिल माधव दवे जी की प्रेरणा के कारण रही है। उनकी कल्पना आज मूर्त रूप ले रही है और हमें इस कल्पना को समर्पित भाव से आगे बढ़ाना है। सांसद ने कहा कि आज हम सब दवे जी को याद कर मां नर्मदा को साफ रखने का संकल्प लेंगे। श्री राव ने कहा कि मां नर्मदा हमें इतनी सामर्थता दे कि हम सब दवे जी के सपने को साकार कर सके।
    श्री शैलेन्द्र शर्मा ने आयोजित नदी महोत्सव कार्यक्रम पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डालते हुए बताया कि इस बार आयोजन मंडल ने तय किया है कि श्री दवे जी के नाम से इस परिसर का नाम रखा जाएगा। उन्होने नदी महोत्सव कार्यक्रम में सहयोग करने वाली सभी संस्थाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने कहा कि नदी संरक्षण पर कार्य कर रही सभी संस्थाओं को नर्मदा समग्र से जोडा जाएगा। उन्होने बताया कि पंचम नदी महोत्सव में 175 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। सामुदायिक नेतृत्व के 306 छात्र-छात्राओ ने इस आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई। राजीव गांधी प्रोद्योगिकी संस्था के 35 छात्र, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 25 विद्यार्थियो ने प्रदेश के बाहर के 30 विद्यार्थियो ने यहां आकर नदी संरक्षण पर चिंतन एवं मनन किया। इसके अलावा 380 प्रतिभागी इस आयोजन में शामिल रहे।
    समापन कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पांडे ने आभार व्यक्त किया।
   समापन कार्यक्रम के अवसर पर संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत, सचिव दीनदयाल शोध संस्थान नई दिल्ली श्री अतुल जैन, भाजपा उपाध्यक्ष श्री बृजेश लुनावत, जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री राघवेन्द्र गौतम, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री कुशल पटेल, श्री अनिल पिल्ले, पूर्व मंत्री श्री मधुकर राव हर्णे, बैरसिया विधायक श्री विष्णु खत्री, सोहागपुर विधायक श्री विजयपाल सिंह, पिपरिया विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी, म.प्र.खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, श्री अभय दवे, जनप्रतिनिधिगण, प्रतिभागी, नर्मदा संरक्षण पर कार्य रही सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

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