| पंचम नदी महोत्सव का हुआ समापन |
| अनुपपुर | 18-मार्च-2018 |
पंचम नदी महोत्सव का गत दिवस समापन किया गया। समापन अवसर पर जनअभियान परिषद के कार्यकर्ता, प्रस्फुटन समिति के सदस्यगण, नदी संरक्षण पर कार्य कर रही सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि गणों एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक बैठक में अपने अनुभव सभी से साझा किए। इस अवसर पर मौजूद उत्तमस्वामी ने कहा कि यदि हमें जीवन में कुछ करना है तो नदी का संरक्षण अनिवार्य रूप से करें। पूरे ब्राहमांड में माता नर्मदा श्रेष्ठ पद पर विराजी है। हमारे वेद में नदियो को देव माना गया है और पूरे भारत में नदियों की पूजा की जाती है। उन्होने कहा कि यदि हम नदी का संरक्षण करते है तो इससे बड़ा पुण्य का कोई कार्य नहीं है। हम नदियों में जाते तो अवश्य है किन्तु नदी की सफाई नहीं करते है। नदी तो परोपकार करती हुई बहती है। हम सब नदी को पुण्यात्मा मानकर कार्य करें। यदि हम एक व्यक्ति को भी नदी में कचरा डालने से रोक ले तो यह अपने आप में बद्रीनाथ एवं केदारनाथ की यात्रा करने के बराबर होगा। यदि हम नदी को संरक्षित कर ले तो यह हजारो माला का जाप करने के बराबर होगा। यदि हम मन व बुद्धि से स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे जैसा संकल्प ले कि हम आज से प्रतिदिन 5 लोगो को नदी में कचरा डालने से रोके और प्रतिदिन एक घण्टा नदी के समीप बिताएं।
समापन अवसर पर प्रतिभागियो ने भी अपने कथन एवं विचार से सभी को अवगत कराया। खरगोन एक प्रतिभागी ने बताया कि मण्डलेश्वर में प्रतिदिन सफाई का कार्य किया जा रहा है लेकिन जितना हम नदी को साफ करते है लोग उतनी ही गंदगी वहां डाल देते है। लोगो को रोकने पर वे कहते है कि पहले शहर के नाले साफ करें। सिवनी के ग्राम जाम के एक प्रतिभागी ने बताया कि उन्होने अपने गांव की नदी पर पशुओ के पानी पीने के लिए अलग स्थान बना दिया है। कचरा एवं गंदगी डालने के लिए एक स्थान निश्चित किया है। रीवा के प्रतिभागी विक्रांत द्विवेदी ने बताया कि उन्होने बिछुआ नदी पर कार्य किया है पहले नदी में कचरा एवं गंदगी थी उन्होने कुछ लोगो को जागरूक कर नदी के उद्गम स्थल से लेकर संगम तक का सर्वे कर, पद यात्रा कर लोगो को जागरूक किया। पहले वर्ष 21 दिन का श्रमदान किया गया, दूसरे वर्ष 61 दिन का, तीसरे वर्ष 100 दिन का श्रमदान किया गया। इससे लोग आकर्षित हुए और नदी साफ सुथरी हुई। वर्तमान में एक करोड की कार्य योजना बनाई गई है। नदी में फूल एवं नारियल का विर्सजन प्रतिबंधित किया गया है। मांडू से आये एक प्रतिभागी ने बताया कि रेवा कुण्ड स्थान पर प्रति वर्ष परिक्रमा वासी आते है आने का रास्ता तो ठीक है किन्तु उतरने का रास्ता कठिन है। उन्होने उतरने के रास्ते को सुगम बनाने की मांग की। उमरिया जिले के बांधवगढ के एक प्रतिभागी ने बताया कि उनके ग्राम से चरण गंगा नदी बहती है जो आगे जाकर टोक नदी में मिलती है। उन्होने नदी पर छोटे-छोटे बोरी बंधान किये है इससे वर्ष भर पानी गांव वालो को मिलता है। इससे 300 एकड जमीन भी सिंचित हो रही है। उज्जैन से आए विकास पाठक ने बताया कि सरकारी तंत्र के कारण क्षिप्रा नदी में कई प्रकार की समस्याएं आ रही है और जैव विविधता नष्ट हो रही है। उज्जैन में कई तालाब को पूर कर सड़क बनाई जा रही है, जल स्त्रोतो पर भी सड़क का निर्माण हो रहा है। जैवंती नदी का स्वरूप भवनो के निर्माण से बिगड रहा है। मंडला के प्रतिभागी श्री राकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होने सहोदर नदी को गोद लिया है यह नदी महादेव पहाडी से निकलती है उन्होने गांव में बैठक कर लोगो को नदी संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया है। नदी में 400 स्क्वेयर फीट का गड्ढा किया जिससे पानी रूक गया है। अब गांव वालो को पशुओ के पानी के लिए ईधर उधर भटकना नहीं पडता है। उमरिया के जयसिंह ने बताया कि उन्होने गांव की नदी में बोरी बंधान का कार्य किया इससे नदी का जल स्तर बढ गया। श्योपुर कलां के नरेश कुमार ने बताया कि गांव की नदी में लगातार मिट्टी इक्टठा हो रही थी गांव वालो की मदद से मिट्टी को नदी मे जाने से रोका गया है इससे पानी का प्रवाह बढ़ा और पानी साफ भी हुआ। श्योपुर कलां के ही नीतेश शर्मा ने बताया कि धन्वन्ती नदी पर श्रमदान कर उसका गहरी करण कर जल के स्तर को बढ़ाया गया। गुना के कृष्णकुमार ने बताया कि उन्होने नदी जोडो अभियान के तहत गांव-गांव बैठक कर नदी में बोरी बंधान बनाए और चेक डेम बनाए इससे अब वर्ष भर पानी रहता है। मंडला के डॉ गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि उन्होने नादिया नदी पर कार्य किया है गांव वाले पहले नादिया को नदी ना मानकर महज नाला मानते थे। प्रथम चरण में इस नदी के उद्गम स्थल से लेकर संगम स्थल तक सर्वे कर और श्रमदान के माध्यम से बोर बंधान किया गया आसपास वृक्षारोपण किया गया। जबलपुर के श्री विनोद शर्मा ने कहा कि वे नदी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे है। उन्होने नई नदी नीति में नदी को प्रदूषित करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करने की मांग की। उन्होने बताया कि उन्होने पैरियट नदी पर कार्य किया है। उन्होने कहा कि यदि हम छोटी-छोटी शिशु नदी पर कार्य करेगे तभी बडी नदियां बच पाएगी। राजस्थान से आई श्रीमती कमला मीणा ने बताया कि उन्होने सर्व प्रथम कुए के पानी को साफ किया और उसका जल स्तर बढ़ाया। इनकी देखादेखी गांव की अन्य महिलाओ ने भी कुओं के संरक्षण पर कार्य करना शुरू किया। आज उनके टोक जिले में छोटी नदियों में प्रतिवर्ष पानी रहता है। रीवा के श्री अखिलेश कुमार ने पुरवई नदी पर सीहोर के शंभु सिंह ने नर्मदा नदी पर किए गये अपने कार्य की विस्तार से जानकारी दी। शहडोल, डिंडोरी, बालाघाट, जबलपुर, मुरैना से आए हुए प्रतिभागियो ने भी नदी संरक्षण के लिए किए गए अपने कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर नर्मदा समग्र द्वारा नदी महोत्सव पर बनाई गई लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर संगठन मंत्री श्री सुहास भगत, म.प्र.खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, श्री हरिशंकर जायसवाल मौजूद थे। |
Monday, March 19, 2018
पंचम नदी महोत्सव का हुआ समापन
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