Wednesday, April 11, 2018

"सफलता की कहानी" जिले के सुदूर अंचल में इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता से 20 हजार ग्रामीण हो रहे लाभान्वित

"सफलता की कहानी" जिले के सुदूर अंचल में इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता से 20 हजार ग्रामीण हो रहे लाभान्वित  
13 इंटरनेट टावरों की स्थापना से दूरियॉं हुई कम 
अनुपपुर | 11-अप्रैल-2018
 
  
   केन्द्र एवं राज्य सरकार की दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प के परिपालन में जिला प्रशासन द्वारा कलेक्टर श्री अजय कुमार शर्मा के नेतृत्व में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यों को जिले में अंजाम दिया जा रहा है। जिला प्रशासन सुदूर ग्रामीण अंचल में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सुविधाओं का लाभ ग्रामीणों को प्रदान करने के दृष्टिकोण से जिले के पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के सुदूर ग्राम पंचायतों सरई, पड़मनिया, बड़ीतुम्मी के साथ ही बैगा बाहुल्य गर्जनबीजा, पिपरखुटा, खेतगांव, बिलासपुर, अमदरी, लेढरा, पटनाकला, इटौर, पशुटोला, लीलाटोला में इंटरनेट सुविधाओं के लिये जिला प्रशासन द्वारा इंटरनेट टावरों की स्थापना की गई है। जिससे बैंकिंग सहित अन्य इंटरनेट संबंधित सुविधा मिलने से ग्रामीण, आदिवासी, बैगा आदि को अब 30 से 40 किलोमीटर का लम्बा व कष्टप्रद सफर तय नहीं करना पड़ता। अब अपने ही गांव के आस-पास यह सुविधा प्राप्त कर ग्रामीणजन लाभान्वित हो रहे हैं। इंटरनेट सुविधा के सुदूर अंचल तक विस्तार होने से जिला प्रशासन ने गांव के ही स्थानीय युवाओं को कियोस्क संचालन का प्रशिक्षण देकर कार्य संचालन के लिये दक्ष किया है। इंटरनेट बैंकिंग की इस सुविधा को पाकर लगभग 20 हजार ग्रामीणजन लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही शासकीय योजनाओं की डाटा एण्ट्री, पेंशन, मजदूरी आदि की जानकारी लेने के लिए अब उन्हें लम्बी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे उन्हें समय तथा आर्थिक व्यय से जूझना नहीं पड़ता है। बल्कि समय व व्यय की बचत हो रही है। जिला प्रशासन के सूझ-बूझ भरे इस निर्णय की सार्थकता लाभान्वित क्षेत्र के ग्रामीणों, बैंगा आदिवासियों के चेहरे की खुशी के रूप में देखी जा सकती है। ग्रामीणों को नई पहल के रूप में ई-सेवाऐं मिलना उनके बेहतर सुविधा के साथ ही दुनिया को मुट्ठी में कर लेने के सपने जैसा है। आने वाले समय में इंटरनेट की सुविधाओं को बेहतर विकल्प के रूप में और भी विस्तारित करने प्रयास जारी है। इंटरनेट सुविधाओं के विस्तार के संबंध में चर्चा करते हुये कलेक्टर श्री अजय कुमार शर्मा कहते हैं कि जब उन्होंने इस क्षेत्र का भ्रमण किया तो मालूम पड़ा की संचार क्रॉति के इस युग में भी छोटी-छोटी समस्याओं के निदान के लिए ग्रामीणों को 30 से 40 किलोमीटर दूर शहडोल जाना पड़ता है। जानकारी मिलने पर मैंने फैसला किया कि इस समस्या से ग्रामीणों को मुक्ति दिलाई जायेगी और हमारे कुछ प्रयासों से ही हमें सफलता मिलना प्रारम्भ हो गई और परिणाम सार्थक स्वरूप में दिखने लगे।

   जिला प्रशासन की यह पहल एकात्म मानववाद के प्रेरणास्त्रोत पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास की धारा से जोड़ने की सार्थकता सिद्ध करती है।

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