| गाँव वालों की आय बढ़ाने के प्रयासों से गाँवों में आई है खुशहाली |
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| अनुपपुर | 04-मार्च-2018 |
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का कार्यकाल मध्यप्रदेश की प्रगति में टर्निंग प्वांइट सिद्ध हुआ है। उनके संकल्प धरातल पर दिखने लगे है। बेटियों को बोझ समझने की सदियों पुरानी मानसिकता से समाज को मुक्त कराने के उनके कार्य की जितनी भी प्रशंसा की जाये, कम है। महिलाओं का सशक्तिकरण होने से ग्रामीण महिलाएँ स्व-सहायता समूह, आजीविका परियोजना, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना आदि से जुड़कर परिवार की सामाजिक-आर्थिक उन्नति का कारण बन रही हैं। बेटियों के जन्म संबंधी सोच में आये अद्भुत बदलाव का लाभ देश और प्रदेश को भी मिल रहा है। प्रदेश प्रगति की ओर अधिक गति से अग्रसर हो रहा है। प्रदेश की पर केपिटा आय बढ़ी है। मुख्यमंत्री ग्रामीणों की आय बढ़ाने के जो प्रयास कर रहे हैं उनमें मछली-पालन और पशुपालन विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है। इससे किसान परिवारों को आय का अतिरिक्त जरिया मिला है। मत्स्य पालकों को उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण देने से प्रदेश में इस वर्ष एक लाख 38 हजार टन मत्स्योत्पादन हुआ, जो गत वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। मत्स्य-पालकों को 0 प्रतिशत ब्याज दर पर आर्थिक सहायता दिलाने के लिये 58 हजार मछुआ क्रेडिट कार्ड बनवाये जा चुके हैं। सुव्यवस्थित मत्स्य-विक्रय के लिय 8 थोक और 187 फुटकर मछली बाजार स्थापित किये गये हैं।
सदियों से किसान और पशुधन का साथ रहा है। मुख्यमंत्री आज इसी पशुधन की सहायता से किसानों की आय को दोगुना करने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016-17 से आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना शुरू करवाई है। इसमें पालक को 10 लाख रुपये तक की राशि डेयरी इकाई के लिये दी जाती है। वर्ष 2017-18 में 1350 हितग्राहियों को 18 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सहायता दी गई। प्रदेश में वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन 12.14 मिलियन था, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 13.45 मिलियन टन हो गया। आज दूध उत्पादन में प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है और किसानों को आय का एक मजबूत अतिरिक्त जरिया हासिल है। किसानों के पशु स्वस्थ रहें और भरपूर उत्पादन दें, इसके लिये पिछले साल से गोकुल महोत्सव शुरू किया गया है। गत वर्ष 28 अक्टूबर से 30 नवम्बर 2017 तक हुए गोकुल महोत्सव में प्रदेश के 50 हजार 700 गाँवों के 24 लाख 45 हजार पशुपालकों के एक करोड़ 62 लाख 26 हजार पशुओं को उन्हीं के गांव-घर में चिकित्सा सुविधाएँ दी गईं। बकरी पालन के लिये 1875 हितग्राहियों को 448 लाख का अनुदान भी दिया गया। दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरी कार्यक्रम का लाभ दिलाने के लिये प्रदेश के लगभग 27 हजार दुग्ध उपलब्धता वाले गाँव का सर्वेक्षण करवाया गया। आज इनमें 3034 दुग्ध संकलन केन्द्र चल रहे हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन डेढ़ हजार किलोग्राम से अधिक दूध संकलन किया जा रहा है। प्रदेश में 6700 दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री की मंशा को देखते हुए अक्टूबर 2017 तक 348 नई समितियों का गठन किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिये दूध क्रय रेट 600 रुपये प्रति किलो फेट की दर से बढ़ाकर 620 रुपये किया गया। वर्ष 2017-18 में अक्टूबर तक दुग्ध उत्पादकों को 791 करोड़ का भुगतान किया गया, जो गत वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है। इससे लगभग एक लाख 77 हजार दुग्ध उत्पादक लाभान्वित हुए हैं। पशु आहार सुदाना की विक्रय दरों में भी 50 पैसे प्रति किलो की कमी की गई। इससे दुग्ध उत्पादकों को उत्पादन लागत में राहत मिली। प्रदेश में डेयरी, कुक्कुट, बकरी, शूकर, कड़कनाथ आदि से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये भी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। पशुपालन विभाग कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों और महिलाओं को इनका अधिकाधिक लाभ दिलाने के लिये काम कर रहा है। यह मुख्यमंत्री की सोच और मध्य्रपदेश की उन्नति के लिये जुनून का ही कमाल है कि आज आदिवासी क्षेत्रों और गाँवों में सोच बदली है। महिलाएँ झिझक छोड़कर घर- परिवार संभालने के साथ आर्थिक दशा भी मजबूत कर रही हैं। महिलाएँ बैंक सखी, रेडीमेड गारमेंट, पशु-मछली पालन, सिलाई, उद्यानिकी आदि के प्रति अग्रसर हुई हैं। सरकारी योजनाओं के प्रति उपजी जागरूकता का परिणाम उनके बच्चों की अच्छी परवरिश के रूप में सामने आ रहा है। ये बच्चे आगे चलकर देश और प्रदेश का उज्जवल भविष्य बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समाज के हर वर्ग की चिन्ता की है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों को प्रदेश की ओर आकर्षित कर और नयी रोजगार योजनाएँ आरंभ कर युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर मुहैया करवाये हैं। प्रतिवर्ष होने वाले सूर्य नमस्कार से विद्यार्थियों में बाल्यावस्था से ही मानसिक और शारीरिक फिटनेस के लिये संस्कार आ रहा है। |
Sunday, March 4, 2018
गाँव वालों की आय बढ़ाने के प्रयासों से गाँवों में आई है खुशहाली
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