Friday, April 20, 2018

(सफलता की कहानी) हौसलों से नरबदिया ने मात दी दिव्यांगता को


 
अनुपपुर | 20-अप्रैल-2018
 
   
   अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम कछराटोला की रहने वाली दिव्यांग नरबदिया बाई ने अपने हौसलों से गरीबी और दिव्यांगता को मात देते हुए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। म.प्र.दीन दयाल अन्त्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अनूपपुर के अंतर्गत कोया स्व सहायता समूह की सदस्य नरबदिया बाई के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन पास कृषि कार्य था, जमीन एक फसली एवं असिंचित होने के कारण पर्याप्त उपज नहीं हो पाती थी, इसलिए माता-पिता को परिवार के भरण पोषण के लिए मजदूरी भी करनी पड़ती थी। स्वयं पैर से दिव्यांग होने की वजह से कोई भी मेहनत मजदूरी का काम करना नरबदिया के लिए संभव नहीं था। छोटी मोटी जरूरतों के लिए भी पास पड़ोस से उधार लेना पड़ता था या ज्यादा जरूरत पड़ने पर बदले में अपनी संपत्ति गिरवी रखना पड़ता था। आस पड़ोस के लोग बताते हैं कि कभी कभी तो परिवार को खाने के लाले भी पड़ जाते थे। नरबदिया ने इन सब स्थितियों के बीच किसी तरह अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की एवं साथ ही सिलाई का कार्य भी सीखती रही।
   नरबदिया बाई ने कोया स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद सात हजार रू. ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई का काम प्रारंभ किया। कुछ दिनों घर में सिलाई का कार्य करने के बाद नरबदिया ने अपना काम समीप के लालपुर टेढी ग्राम में सिलाई का काम प्रारंभ किया और धीरे - धीरे उसे अपने सिलाई कढ़ाई के काम से लाभ होने लगा। प्रतिदिन औसतन 300 रू. से 400 रू. की आय के साथ-साथ विशेष अवसरों पर प्रतिदिन 1000 रूपये की आमदनी भी हो जाती है।
   सिलाई कार्य अच्छे से चलने के कारण अब परिवार को मेहनत मजदूरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, अपने इस कार्य के साथ ही साथ नरबदिया ने आई टी आई बेनीबारी से कम्प्यूटर मे एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स भी कर लिया है और उसकी इच्छा है कि वह भविष्य में कम्प्यूटर दुकान भी खोले।

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