Tuesday, July 3, 2018

सोयाबीन बोनी में बरतें सावधानियां - उपसंचालक कृषि

सोयाबीन बोनी में बरतें सावधानियां - उपसंचालक कृषि 
 
अनुपपुर | 03-जुलाई-2018
 
   
    उप संचालक कृषि श्री एन डी गुप्ता ने बताया कि मानसून का आगमन जिन क्षेत्रों में हो चुका है वहां बतर मिलते ही सोयाबीन की बोवनी जल्द से जल्द करें, रोगों की रोकथाम हेतु बीजोपचार अवश्य करें। इस हेतु प्रति एक किलोग्राम बीज में 2 ग्राम थामरम़ 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम अथवा थाइरस 2 ग्राम थाइरस 1ग्राम कार्बाक्सीन अथवा जैविक फफूंदनाशक ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम से उपचार करें। तत्पश्चात कीटनाशक थायामिथाक्सम 30 एफ.एस. (10 मि.ली./कि.ग्रा. बीज) या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफ.एस. (1.2 मि.ली./कि.ग्रा.बीज) से बीज को उपचारित कर जैविक कल्चर राइझोबियम एवं पी.एस.बी. प्रत्येक 5 ग्रा./कि.ग्रा. बीज से उपचारितकर बौवनी करें।
    खरपतवार की अधिकता होने पर बोवनी के तुंरत बाद एवं सोयाबीन के अंकुरण एवं खरपतवारनाशक जैसे डाइक्लोसुलम 26 ग्राम./ है अथवा सल्फेन्ट्राझोन 750 मि.ली./ है अथवा पैन्डीमिथालीन 3.25 ली./ है की दर से छिड़ाकाव करें। जहां पर सोयाबीन अंकुरित हो चुकी है वहा पर नीला भृंग कीट के प्रकोप होने की संभावना हो सकती है। अतः नीला भृंग की गतिविधि दिखाई देने पर क्वीनालफॉस 1.5 ली./हे. की दर से छिड़काव कर कीट का नियंत्रण करें।
    विगत वर्ष जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल पर व्हाइट ग्रब (सफेद सूंडी) का प्रकोप हुआ था वहां के किसान विशेष रूप से ध्यान देकर, व्हाइट ग्रब के वयस्कों को एकत्र कर नष्ट करने के लिए प्रकाश जाल अथवा फिरोमोन ट्रैप का प्रयोग करें। बोवाई से पूर्व इमिडाक्लेप्रिड 48 एफ. एस. (1.25 मि.ली. प्रति किलो बीज) से बीजोपचार अवश्य करें। 

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