Monday, April 16, 2018

बाल विवाह अपराध, सेवा प्रदाता भी हैं सजा के भागीदार - कलेक्टर श्री अजय शर्मा

बाल विवाह अपराध, सेवा प्रदाता भी हैं सजा के भागीदार - कलेक्टर श्री अजय शर्मा 
 
अनुपपुर | 16-अप्रैल-2018
 
   18 अप्रैल को अक्षय तृतीया एवं उस दिन बहुतायत मे होने वाले विवाहों का संज्ञान लेते हुए, तहसीलदारों एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को आवश्यक निगरानी के निर्देश दिए हैं। आपने कहा कि बाल विवाह रोकना एवं इसे हतोत्साहित करना हर समझदार और कानूनप्रिय व्यक्ति की जिम्मेदारी है, इसलिये यह अवश्य सोचें कि कहीं आप 18 वर्ष से कम उम्र की लाडली बिटिया का विवाह करके उसकी जिंदगी अनजाने जोखिम में डालने तो नहीं जा रहे हैं। आपने अक्षय तृतीया एवं विशेष तिथियों मे जिले के सामूहिक विवाह कराने वाले आयोजकों, सभी धर्मगुरू, समाज के मुखिया, हलवाई, केटरर, बैंडवाला, घोड़ीवाला, ट्रांसपोर्ट, प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक, ब्यूटी पार्लर, संचालक मंगल भवन और अन्य संबंधितों से कहा है कि वे किसी विवाह या समारोह में शामिल होने से पहले यह अवश्य देख लें कि कहीं वो बाल विवाह तो नहीं है। यदि बाल विवाह हो तो इसे रोकने में शासन का सहयोग करें।
   आपने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम में दंड प्रावधान के अंतर्गत बालिका की आयु 18 वर्ष और बालक की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होना चाहिये। अधिनियम अनुसार ऐसे विवाह में शामिल प्रत्येक व्यक्ति सजा का भागीदार होता है चाहे वह विवाह में सेवा देने वाले सेवा प्रदाता ही क्यों न हों। बाल विवाह कराने पर 2 वर्ष की सजा व 1 लाख तक का जुर्माना या इससे भी अधिक हो सकता है।

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