कृषि उन्नति मेले में माननीय प्रधानमंत्री जी के ऊदबोधन को अनूपपुर
के कृषकों ने सुना
कृषि आय को २०२२ तक दोगुना करना है लक्ष्य
अनूपपुर 17 मार्च 2018/ भारतीय कृषि शोध
संस्थान पूसा, नई दिल्ली में आज से तीन दिवसीय कृषि उन्नति मेले का प्रारम्भ हुआ। मेले में
देश के विभिन्न कोनो से आए हुए एक लाख से भी ज़्यादा कृषकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा २५
कृषि विज्ञान केंद्रों का शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही देश में कृषि विज्ञान
केंद्रों की संख्या ७०० हो गयी है। कृषकों तक उन्नत तकनीकि को पहुँचाना है इनका
लक्ष्य। इसके साथ ही जैविक कृषि पोर्टल का उदघाटन भी अपने द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में कृषि कर्मण पुरुष्कार एवं दीनदयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन
पुरुष्कार वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा आज मुझे यहां खेती के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले किसान
भाई-बहनों को सम्मानित करने का भी अवसर मिला है। कृषि कर्मण और पंडित दीन दयाल
उपाध्याय कृषि प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित सभी राज्यों और लोगों को मैं
बहुत-बहुत बधाई देता हूं।आज मेरा ये विश्वास और सुदृढ़ हो गया है कि जब
लक्ष्य स्पष्ट हो, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए खुद को दिन-रात खपाने का इरादा हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है। हमारे देश के किसान में वो हौसला है कि वो
मुश्किल लगने वाले लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकता है।हमें नहीं भूलना
चाहिए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में अनाज उत्पादन की क्या स्थिति थी।
संकट भरे उस दौर से हमारा अन्नदाता हमें बाहर निकालकर लाया है। आज देश में रिकॉर्ड
अनाज उत्पादन, रिकॉर्ड दाल उत्पादन, रिकॉर्ड फल – सब्जियों का उत्पादन, रिकॉर्ड दुग्ध उद्पादन हो रहा है।इसलिए मैं देश के हर
किसान को, कृषि उन्नति में लगी हर माता-बहन-बेटी को शत-शत नमन करता हूं।आपने कहा हमारे देश में कृषि सेक्टर ने अनेक मामलों में पूरी दुनिया को
राह दिखाई है। लेकिन समय के साथ जो चुनौतियां खेती से जुड़ती चली गईं, वो आज के इस दौर में बहुत अहम हैं।चुनौतियों को पूरी समग्रता के साथ
निपटने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इन अलग-अलग कार्यों की
दिशा एक है- किसान की आय दोगुनी करना, लक्ष्य एक है- किसानों का
जीवन आसान बनाना। हम इस संकल्प पथ पर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।आज देश
में 11 करोड़ से ज्यादा सॉयल हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके हैं। सॉयल
हेल्थ कार्ड से मिल रही जानकारी के आधार पर, जो किसान खेती कर रहे हैं, उनकी पैदावार बढ़ने के साथ-साथ खाद पर खर्च भी कम हो रहा है।प्रधानमंत्री
सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी के विजन के साथ कार्य किया जा रहा है। जो
सिंचाई परियोजनाएं दशकों से अधूरी पड़ी थी, उन्हें 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करके पूरा किया जा रहा है।प्रधानमंत्री
किसान संपदा योजना के जरिए, हमारी सरकार खेत से लेकर बाजार तक, पूरी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है, आधुनिक एग्रीकल्चर
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।इस बजट में जिस ऑपरेशन ग्रीन्स का ऐलान किया है, वो भी नई सप्लाई चेन व्यवस्था से जुड़ा है। ये फल और सब्जियां
पैदा करने वाले और खासतौर पर TOP यानि Tomato(टमाटर), Onion (प्याज़) और Potato (आलू) उगाने वाले किसानों के लिए लाभकारी रहेगा।किसान हित से
जुड़े कई मॉडल एक्ट बनाकर राज्य सरकारों से उन्हें लागू करने का भी आग्रह किया गया
है। ये कानून राज्यों में लागू होने के बाद किसानों को सशक्त करने का काम करेंगे।किसानों
को आधुनिक बीज मिले, आवश्यक बिजली मिले, बाजार तक कोई परेशानी न हो, उन्हें फसल की उचित कीमत मिले, इसके लिए हमारी सरकार
दिन-रात एक कर रही है।देश के परिश्रमी किसानों की आय से जुड़ा ये बहुत
महत्वपूर्ण कदम है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की गणना के संबंध मे समझाया
न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऐलान का पूरा लाभ किसानों को मिले, इसके लिए हम राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।सरकार ने तय
किया है कि अधिसूचित फसलों के लिए, न्यूनतम समर्थन मूल्य – यानि की MSP, उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुना घोषित किया जाएगा।MSP के लिए जो लागत जोड़ी जाएगी, उसमें दूसरे श्रमिक के
परिश्रम का मूल्य, अपने मवेशी-मशीन या किराए पर लिए गए मवेशी या मशीन का खर्च, बीज का मूल्य, सभी तरह की खाद का मूल्य, सिंचाई के ऊपर किया गया खर्च, राज्य सरकार को दिया गया लैंड रेवेन्यू।वर्किंग कैपिटल के ऊपर दिया गया
ब्याज, Lease ली गई जमीन के लिए दिया गया किराया, और अन्य खर्च शामिल हैं। इतना ही नहीं किसान के
द्वारा खुद और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए श्रम के योगदान का भी मूल्य, उत्पादन लागत में जोड़ा जाएगा।
किसानो को दिलाना है फसल की उचित कीमत
किसानों को फसल की उचित कीमत के लिए देश में कृषि उत्पाद विक्रय व्यवस्था पर भी बहुत व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। गांव की स्थानीय
मंडियों का थोक बाज़ार और फिर वैश्विक
बाज़ार तक तालमेल बिठाना बहुत आवश्यक है।सरकार
का प्रयास है कि किसानो को अपनी उपज बेचने के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़े। इस बजट
में ग्रामीण रीटेल एग्रीकल्चर मार्केट- यानि Gram की अवधारणा इसी का परिणाम है।इसके
तहत देश के 22 हजार ग्रामीण हाटों को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपग्रेड
किया जाएगा और फिर इन्हें APMC और e-Nam प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेड कर दिया जाएगा।यानि एक तरह
से अपने खेत के 5-6 किलोमीटर के दायरे में किसान के पास ऐसी व्यवस्था होगी, जो उसे देश के किसी भी मार्केट से कनेक्ट कर देगी।किसान इन ग्रामीण
हाटों पर ही अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेच सकेगा। आने वाले दिनों में ये केंद्र, किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार और कृषि आधारित ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था के नए
केंद्र बनेंगे।
एफ़पीओ को विशेष सहायता दी जाएगी
सरकार Farmer Producer
Organization- FPO को बढ़ावा दे रही है। किसान
अपने क्षेत्र में, अपने स्तर पर छोटे-छोटे संगठन बनाकर भी ग्रामीण हाटों और बड़ी
मंडियों से जुड़ सकते हैं।इस बजट में सरकार ने ये भी ऐलान किया है कि ‘Farmer Producer Organizations’ को कॉपरेटिव सोसायटियों की तरह ही इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी।महिला
सेल्फ हेल्प ग्रुपों को इन ‘फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन’ की मदद के साथ ऑर्गैनिक, एरोमैटिक और हर्बल खेती के साथ जोड़ने की योजना भी किसानों की आय बढ़ाने
में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
जैविक उत्पादों से कृषि आय मे होगी वृद्धि
जैविक उत्पादों पर जोर देते हुए आपने कहा कि ये जितने पुरातन हैं, उतने ही आधुनिक भी हैं।
सच्चाई यही है कि हम दुनिया के सबसे पुराने जैविक कृषि करने वाले देशों में से एक हैं। आज देश में 22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर जैविक कृषि होती है।लेकिन
दूसरी सच्चाई ये भी है कि जैविक
कृषि के बाद जो अगला चरण है, वैल्यू एडिशन का, मार्केटिंग का, उसमें हम पीछे रह गए। इस कमी को दूर करने में E-Marketing Portal से काफी मदद मिलेगी।सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना के
अंतर्गत जैविक कृषि को पूरे देश में प्रोत्साहित करने में जुटी है। विशेष रूप से उत्तर पूर्व
को ऑर्गेनिक खेती के केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है।एग्रीकल्चर में भविष्य इसी तरह के
नए सेक्टर्स की उन्नति, किसानों की उन्नति में सहायक होगी। हरित और श्वेत क्रांति
के साथ ही जितना ज्यादा हम जैविक क्रांति, जल क्रांति, ब्लू क्रांति, स्वीट क्रांतिपर बल देंगे, उतना ही किसानों की आय बढ़ेगी।
कार्यक्रम का अनूपपुर ज़िले मे कृषि विज्ञान केन्द्रो मे प्रदर्शन
किया गया। जिसे यहाँ के कृषको एवं कृषि वैज्ञानिको ने सुना। कृषि विज्ञान केन्द्रों
मे कृषको एवं कृषि वैज्ञानिको के अतिरिक्त प्रबुद्ध जानो एवं जन प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम
का श्रवण एवं दर्शन किया।

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