सफलता की कहानी
बहू की मांग को सास ने स्वीकारा
नए मेहमान के आगमन के पहले शौचालय निर्माण के लिए स्वयं उठाई कुदाल
अनूपपुर 14 जून 2018/ विकास की नित नयी सीढ़ियाँ चढ़ रहा हमारा देश, ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का धनी रहा है। इसके बावजूद आज भी यहाँ के निवासियों को जीवन की मूलभूत जरूरतों, जीवन जीने के व्यवस्थित तरीकों एवं स्वच्छता की समझ न होना एक चिंतनीय विषय है। ऐसे मे यह आवश्यक है कि हमारी युवा पीढ़ी स्वयं आगे आकर सुव्यवस्थित रहने के तरीकों से सबको अवगत कराये। समाज के वरिष्ठ जनो से यह अपेक्षा है कि वे यह सकारात्मक बदलाव सहर्ष स्वीकार करें।
उक्त बातों को वास्तविकता के धरातल मे जनपद पुष्पराजगढ़ की यह घटना प्रदर्शित करती है। जनपद पुष्पराजगढ़ ग्राम पिपरहा की रहने वाली युवती मोहिनी का विवाह ग्राम भेजरी के हेमराज सिंह के साथ होना तय हुआ था। मोहिनी के घर मे शौचालय बना हुआ है व परिवार के सभी सदस्यों के द्वारा उसका उपयोग भी किया जाता है। मोहिनी के घर के सदस्यों को शौचालय के उपयोग का महत्व पता है। शादी की तैयारियां प्रारम्भ हो चुकी थी। जैसा की भारतीय शादियों मे होता है दोनों पक्षों की तरफ से सभी व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक संसाधन जुटा लिये गए थे। तभी मोहिनी को इस बात का पता चला कि उसके ससुराल मे शौचालय नहीं है। इस बात का भान होते ही मोहिनी विचलित हो गयी और उसने समझदारी दिखाते हुए अपनी होने वाली सास संता बाई को फोन किया। मोहिनी ने कहा माँ जी जिस सामाजिक मर्यादा के लिए, संस्कारों के लिए इतने ससाधनों का खर्च हम विवाह मे करते हैं, अगर घर मे शौचालय नहीं रहेगा तो मर्यादा कैसे सुरक्षित रहेगी। ये सारी सुविधाएं इस कमी के कारण बेमानी हो जाएंगी। मोहिनी की इस समझाइश को संता ने बड़प्पन का परिचय देते हुए ध्यान से सुना और सहमत भी हो गयी।
संता बाई ने नए मेहमान के आगमन मे स्वयं कुदाल उठा ली और प्रण लिया अब शौचालय निर्माण के बाद ही मोहिनी को घर लाएँगे। संताबाई के पति और मोहिनी के ससुर श्री हत्तू प्रसाद एवं मोहिनी के होने वाले पति हेमराज भी इस कार्य मे जुट गए हैं। अगर समाज की हर माँ-बेटी, मोहिनी और संता बाई जैसी हो जाए तो स्वच्छ भारत का स्वप्न एक हक़ीक़त बन जाएगा। समाज मे सम्मान की अवधारणा को परिभाषित किया है संताबाई और मोहिनी ने। कलेक्टर श्रीमती अनुग्रह पी एवं मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना ने मोहिनी के साहस एवं संताबाई की समझ की सराहना की है और कहा है ज़िले के समस्त नागरिक इनका अनुकरण करें।
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