Wednesday, March 14, 2018

"सफलता की कहानी" स्वयं की आत्मनिर्भरता के साथ पति का स्वरोजगार भी स्थापित कराया

 "सफलता की कहानी" स्वयं की आत्मनिर्भरता के साथ पति का स्वरोजगार भी स्थापित कराया 
कृषि सीआरपी के रूप में उत्तर प्रदेश में जाकर प्रशिक्षण दिया, समूह से मदद लेकर पति के आटो रिपेयरिंग वर्कशाप को विस्तार दिया 
अनुपपुर | 14-मार्च-2018

   अनूपपुर जिले के ग्राम सकोला, विकासखंड अनूपपुर के कृषि एवं मजदूरी करने वाले परिवार की यशोदा विश्वकर्मा एक सामान्य गृहणी थी जो अपने बच्चो के साथ घर पर ही रहती थी और आवश्यकता पड़ने पर कृषि कार्य में हाथ बटाती थी। गॉव में रहने वाली, गॉव तक ही सीमित थी कहीं आना-जाना बिल्कुल नही हो पाता था, पति आटो मैकेनिक थे जिनकी आय से परिवार का गुजर बसर हो रहा था, कृषि कार्य पूरी तरह प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर था, अच्छी बारिश हो गयी तो धान की फसल हो जाती थी, नही तो घर परिवार के पूरे खर्च का भार आटो मैकेनिक के रूप में होने वाली आय पर ही निर्भर था।
   एक आम गृहिणी की तरह यशोदा भी अपने परिवार की हालत सुधारने के लिए प्रयासरत थी, इस दिशा में उसका पहला कदम था। स्व सहायता समूह से जुड़ना, लक्ष्मी आजीविका स्व सहायता समूह के सदस्य के रूप मे पहली बार समूह से 3000 रूपये का ऋण अपने पति के आटो वर्कशाप में ऑयल खरीदने के लिये लिया, क्योंकि इसके पहले ग्राम सकोला में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इनके पति के पास इतनी पूंजी नही बच पाती थी कि अपने दुकान में आयल का स्टाक रख सकें। वर्कशाप में आयल उपलब्ध कराने की उनकी यह पहल काम आयी और आय में वृद्धि भी हुयी, इससे उत्साहित होकर अपनी आटो रिपेयरिंग वर्कशाप में आटोपार्टस के पुर्जे खरीदने के लिये दूसरी बार में समूह से छः हजार रू. का ऋण लिया और उक्त राशि को किष्तो में ब्याज सहित चुकाने के बाद पुनः समूह से 30000 की राशि ऋण ली और अपने कार्य को विस्तार दिया। आज की स्थिति में दो पहिया वाहनों की रिपेयरिंग एवं आटो पार्ट्स की बिक्री से औसतन चार सौ से पांच सौ रूपये की आय प्रतिदिन हो जाती है।
   कभी अपने घर परिवार तक सीमित यशोदा आज मप्र दीनदयाल अन्त्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से इतनी सक्षम हो गई है कि, दूसरो को जागरूक करने का बीड़ा उठा लिया है, आजीविका मिशन एवं आरसेटी के माध्यम से कृषि गतिविधियो का प्रशिक्षण लेकर कक्षा आठ तक पढ़ी यशोदा अब कृषि सीआरपी बनकर अपने ग्राम और आस-पास के ग्राम में कृषि गतिविधियों का प्रशिक्षण देती है। अपने जिले के साथ-साथ दूसरे राज्यो में भी जाकर कृषि गतिविधि के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश जाकर कृषि सीआरपी का कार्य कर चुकी है, जिससे आय तो होती ही है और समाज में एक सम्मान भी मिल रहा है।

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