Monday, March 12, 2018

हाट बाजारों में सजने लगी दुर्गा की मनिहारी दुकान

हाट बाजारों में सजने लगी दुर्गा की मनिहारी दुकान 
आजीविका समूह से मदद लेकर मनिहारी और किराना व्यवसाय किया प्रारंभ 
अनुपपुर | 12-मार्च-2018
 
   
    अनूपपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड पुष्पराजगढ़ के ग्राम सरई पतेरा की दुर्गा नायक समूह से जुड़ने से पूर्व अपने पति के साथ एक दो कमरों के कच्चे मकान में रहते हुये, मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रही थी। कई बार पति को काम की तलाश में गांव से बाहर भी जाना पड़ता था। बच्चों की शिक्षा दीक्षा में भगवान भरोसे चल रही थी।
    म.प्र. डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बनाये जा रहे समूह से जुड़ने बाद दुर्गा की स्थिति में परिवर्तन आना प्रारंभ हुआ और अपने समूह शिव स्व सहायता समूह से अपनी छोटी छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण लेना प्रारंभ किया तथा समय से वापसी भी करने लगी। समूह से ऋण लेना और वापस करने से दुर्गा के अंदर आत्मविश्वास आया और उसने मनिहारी व्यवसाय के लिए समूह से छः हजार रू ऋण के रूप में लिए और व्यवसाय प्रारंभ किया, धीरे धीरे मनिहारी के काम में लाभ होने लगा और अब दुर्गा के पति भी व्यवसाय बढ़ता देख उसकी मदद करने लगे। मनिहारी का काम अच्छे से जम जाने के बाद, पति पत्नी ने एक अलग व्यवसाय करने की हिम्मत जुटाई और दुर्गा ने पति के लिए समूह से तेरह हजार पांच सौ रू का ऋण समूह से लेकर किराना दुकान की प्रारंभ करवा दी। आज दोनों पति पत्नि समूह से ऋण लेकर किराना और मनिहारी का व्यवसाय सफलता पूर्वक संचालित कर रहे हैं तथा दोनो से परिवार की आय कम से कम प्रति माह दस हजार रू हो जाती है।
    कभी मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन यापन करने वाली दुर्गा आज समूह से जुड़ने के बाद मजदूर से मालिक बन चुकी है। समूह की मदद से स्थापित मनिहारी और किराना व्यवसाय ने उसे और उसके पति को एक सम्मान जनक जिंदगी प्रदान की है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने घर के निर्णयों में भी दुर्गा की भागीदारी बढ़ाई है। अब दुर्गा के अंदर इतना आत्म विश्वास आ चुका है कि कभी घर से बाहर कदम रखन के लिए सोचने वाली दुर्गा अपने दुकान का सामान लेने स्वयं अनूपपुर या शहडोल आती जाती है । सच ही है कुछ करने की ईमानदार कोशिश को यदि एक सहारा मिल जाये तो परिणाम अच्छे ही मिलते हैं। न सिर्फ सामाजिक रूप से दुर्गा के जीवन में बदलाव आया है बल्कि पहले का दो कमरों का कच्चा घर अब टीन शेड में बदल चुका है और आगे दुर्गा अपने पक्के इरादों की तरह अपना घर भी पक्का बनाना चाहती है। उसे पूरा विश्वास है कि समूह का साथ है, तो उसके सारे सपने पूरे हो जायेंगे।

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