सफलता की कहानी
पति को खोने के बाद भी दुलसिया के आत्मनिर्भर रहने की सोच को मिला आजीविका का साथ
स्वयं के रोज़गार से कर रही हैं परिवार का लालन पालन
अनूपपुर 28 अगस्त 2018/ महिलाएँ जितनी संवेदनशील, भावुक एवं सरल होती हैं उतनी ही वो दृढ़ निश्चयी एवं कर्तव्यपरायण होती हैं यह सब हमने कहानियों में तो बहुत पढ़ा है। अक्सर ही हम उनके साहस से मुख़ातिब भी होते रहते हैं। शायद इसीलिए ये कहानियाँ अब कहानियाँ न होकर एक सच्चाई हैं सामाजिक आइना है। ऐसे ही दृढ़ निश्चय की कहानी है अनूपपुर नगरपालिका की निवासी दुलसिया बाई की। जब दुलसिया से उनके पति का साथ छूटा तब उनके ऊपर तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी थी। स्वावलंबी दुलसिया नही चाहती थीं कि बच्चों के लालन पालन के लिए वे किसी के सामने हाथ फैलाएँ। परंतु घर को कैसे चलाएँ ये उन्हें नहीं समझ आ रहा था। तभी दीनदयाल अन्त्योदय शहरी आजीविका मिशन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें सिलाई मशीन के प्रशिक्षण के बारे में बताया। दुलसिया ने एक माह चले सिलाई कोर्स में सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। आजीविका कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के बारे में बताया गया। दुलसिया ने आर्थिक कल्याण योजना के माध्यम से 50 हज़ार रुपए का ऋण लिया इस राशि में से 12 हज़ार 500 रुपए उन्हें अनुदान के रूप में प्राप्त हुए। दुलसिया बाई ने नगरपालिका अनूपपुर द्वारा स्थापित हॉकर्स ज़ोन में सिलाई एवं प्लास्टिक के सामान की दुकान खोली। आज दुलसिया आत्मनिर्भर होकर बिना किसी दबाव के अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। अब वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी पर आश्रित नही हैं। दुलसिया शासन को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि अगर सोच अच्छी हो तो किसी भी समस्या से बाहर निकला जा सकता है शासन सभी लोगों को समस्याओं से निकालने के लिए सदैव खड़ी है। आप कहती हैं मनुष्य को कभी भी हार नही माननी चाहिए समस्याओं से निकलने के कई रास्ते होते हैं बस सही मार्गदर्शक मिलना चाहिए। आप शहरी आजीविका मिशन एवं नगरपालिका अनूपपुर को धन्यवाद देती हैं।
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