Saturday, June 30, 2018

जच्चा-बच्चा की बेहतरी के लिए किये गये प्रयासों के लिए मध्यप्रदेश पुरस्कृत

जच्चा-बच्चा की बेहतरी के लिए किये गये प्रयासों के लिए मध्यप्रदेश पुरस्कृत 
मातृ-मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट के लिए मिली सराहना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश सर्वश्रेष्ठ 
अनुपपुर | 30-जून-2018
 
 
    भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को तीन राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से नवाजा है। मातृ-मृत्यु दर में सर्वाधिक प्रतिशत गिरावट, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में सर्वाधिक गर्भवती महिलाओं की पहुँच और इसी अभियान में सर्वाधिक स्वैच्छिक सेवा प्रदाताओं की संख्या के लिए यह पुरस्कार दिये गये है। अनुकरणीय स्वैच्छिक सेवा के लिए प्रदेश की निजी क्षेत्र की चिकित्सक डॉ. माधुरी चंद्रा  तथा सेवा में निरंतरता के लिए डॉ. अलका अग्रवाल और डॉ. संगीता श्रीवास्तव को भी पुरस्कृत किया गया।
    केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार प्रदान किये। मध्यप्रदेश की ओर से प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रुस्तम सिंह ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस मौके पर एन.एच.एम. मध्यप्रदेश के मिशन संचालक श्री एस. विश्वनाथन भी उपस्थित थे।
    भारत शासन द्वारा करवाये जाने वाले सेम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) 2014-16 के हाल ही में जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में मातृ-मृत्यु दर में 48 अंकों की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होने पर भारत शासन द्वारा मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त प्रधानमत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में निजी क्षेत्र के चिकित्सकों के सहयोग से प्रसव के पहले जाँच एवं उपचार सेवाओं के विस्तार एवं योजना के सक्रिय क्रियान्वयन के लिये भी मध्यप्रदेश की सराहना की गई।
    उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में जच्चा और बच्चा के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें एवं सेवायें उपलब्ध करवाने के लिए शासन स्तर से निरंतर रणनीतिक प्रयास किये जा रहे हैं। इनके कारण प्रदेश में प्रसव पूर्व सेवाओं, संस्थागत प्रसव एवं प्रसव के बाद देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सकारात्मक बदलाव परिलक्षित हो रहा है।
    शासन द्वारा स्वास्थ्य संस्थाओं में सभी नागरिकों के लिए निरूशुल्क औषधी, सामग्री जांचें, भोजन, परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गई है। जिससे संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रत्येक जिला स्तर पर मॉडल मेटर्निटी विंग का निर्माण करवाया गया है तथा मेडिकल कॉलेज में आब्स्टेट्रिक आई.सी.यू का निर्माण करवाकर जच्चा और बच्चा को उच्च गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करवाई जा रहीं है। स्वास्थ्य सेवा प्रदायकर्ताओं के कौशल उन्नयन में वृद्धि के लिये उन्हें आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिये जा रहे हैं। तय मापदण्डों के अनुरूप सेवा प्रदाय सुनिश्चित करने के लिए एएनएम तथा स्टाफ नर्स को सहयोग देने के लिए नर्सिंग मेन्टर्स की भी नियुक्ति की गई है। शासन के इन्हीं प्रयासों के कारण प्रदेश की मातृ-मृत्यु दर 221 (एस.आर.एस. 2011-13) प्रति लाख जीवित जन्म से घटकर 173 (एस.आर.एस. 2014-16) में हुई है।
    वर्ष 2016 से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का क्रियान्वयन पूरे प्रदेश में प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ किया जा रहा है। प्रदेश में प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आयोजन कर अभी तक 14 लाख 65 हजार गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिसमें 651 वालेंटियर्स द्वारा अपनी सेवाएँ दी गई है।

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