| नर्मदा घाटी जलाशयों के उत्कृष्ट प्रबंधन ने जलसंकट से बचाया |
| इंदिरा सागर बना प्रदेश का संकटकालीन वाटर बैंक |
| अनुपपुर | 30-जून-2018 |
पिछले वर्ष अल्प वर्षा से तेजी से गिरते भूजल स्तर और सूखते जलाशयों ने भयावह जल संकट की रूपरेखा निर्धारित कर दी थी, लेकिन नर्मदा घाटी बांध जलाशयों के तत्परता और सतर्कता से किये जल प्रबंधन ने प्रदेश के एक बड़े भूभाग को आसन्न जल संकट से बचा लिया।
सतर्क जल प्रबंधन के तहत अमरकंटक से लेकर ओंकारेश्वर तक नर्मदा जल के प्रवाह में दिसम्बर तक आई कमी की गणना की गई। इसी प्रकार जनवरी से लेकर जून तक नर्मदा जल पर आधारित शहरों, कस्बों, ग्रामो की आवश्यकता का आंकलन किया गया। इस आंकलन के आधार पर जनवरी से जून तक आवश्यक जल संग्रह संधारित करते हुये आवश्यकता अनुसार बांधो से जल निकासी की रूपरेखा निर्धारित की गई। आबादी की आवश्यकता को देखते हुये ही गुजरात की 800 एम.सी.एम. जल पूर्ति मांग स्वीकार नहीं करते हुये गुजरात को सरदार सरोवर जलाशय में संग्रहित जल का उपयोग करने की सहमति दी गई। बरगी, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जलाशयों से आवश्यकतानुसार पहले 3 फिर 5, 7 तथा 10 एम.सी.एम. जल डिस्चार्ज किया गया। इससे नर्मदा जल पर आधारित जबलपुर, कटनी, उज्जैन, इन्दौर, भोपाल, देवास जैसे बडे नगरों के साथ ही नर्मदा पट्टी से लगी एक बड़ी ग्रामीण आबादी को पेयजल, सिंचाई और निस्तार जल की पूर्ति हो सकी। यह सतर्क जल प्रबंधन का ही परिणाम है कि जून माह की भीषण गर्मी और जल अभाव की स्थिति में भी इंदिरा सागर जलाशय को 262.13 मीटर पूर्ण जल स्तर क्षमता की तुलना में 248 से 251 मीटर पर संधारित रखा गया। इसी तरह बरगी जलाशय को 422.76 मीटर पूर्ण जल भराव क्षमता की तुलना में 414 से 417 मीटर तक संधारित रखा गया। ओंकारेश्वर जलाशय को भी 196.60 मीटर जल भराव क्षमता पर 193 मीटर तक संधारित रखा गया। सर्वाधिक जल भण्डारण क्षमता का इंदिरा सागर जलाशय प्रदेश ही नही, भारत का सर्वाधिक बड़ा जलाशय है। इसकी पूर्ण जल भण्डारण क्षमता 7.9 मिलियन एकड फीट अर्थात 12.2 अरब घनमीटर है। जलाशय का विशाल क्षेत्रफल 913.48 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित है। इस प्रकार इंदिरा सागर प्रदेश का विश्वसनीय संकटकालीन वाटर बैंक है। |
Saturday, June 30, 2018
नर्मदा घाटी जलाशयों के उत्कृष्ट प्रबंधन ने जलसंकट से बचाया
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