| संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिये क्रियाशील हैं कौम्बेट दल |
| सूचना मिलते ही क्षेत्रों में पहुँचकर शुरू करते हैं रोग का उपचार |
| अनुपपुर | 25-मई-2018 |
हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु के समाप्त होने और वर्षा ऋतु के प्रारम्भ होने के पहले पानी की कमी, फिर वर्षा के कारण पानी प्रदूषित हो जाने के कारण दस्त रोग (डायरिया, आंत्रशोध एवं कालरा) पीलिया एवं मस्तिष्क ज्वर है। जल, जन्य/संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रदेश में ऐसे 3961 समस्या मूलक ग्रामों की पहचान की गई जहाँ संक्रामक बीमारियां फैलने की संभावना अन्य स्थानों की अपेक्षा अधिक होती है। इनकी रोकथाम के लिये जिला एवं विकास खण्ड स्तर पर कॉम्बेट दल गठित किये गये हैं। प्रदेश में कुल 415 कॉम्बेट दल क्रियाशील हैं। बीमारी की सूचना प्राप्त होते ही ये दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर रोग के उपचार एवं रोकथाम के उपाय शुरू कर देते हैं। प्रदेश के सभी ग्रामों में डिपो होल्डर को ब्लीचिंग पाउडर, जीवन-रक्षक घोल, क्लोरोक्वीन, पैरासिटामॉल, मैट्रोजिल आदि औषधियाँ उपलब्ध करवाई जाती है। डिपो होल्डरों को इन औषधियों के उपयोग के लिये प्रशिक्षण भी दिया गया है। डिपो होल्डर के पास उपलब्ध दवाईयों से होने वाली मृत्यु की घटनाओं में कमी आई है। प्रभावी स्वास्थ्य शिक्षा से आम जनता ओ.आर.एस. (जीवन रक्षक घोल) की उपयोगिता की जानकारी का भरपूर लाभ उठा रही है। संक्रामक रोगों की सतत् मॉनिटरिंग के लिये राज्य स्तर पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संचालनालय में आइ.डी.एस.पी. शाखा कार्यरत है। इसका उद्देश्य संक्रामक बीमारियों का सर्वेक्षण कार्य संपादन तथा संक्रामक बीमारियों की महामारी की तत्काल सूचना प्राप्त कर, शीघ्रताशीघ्र उस पर नियंत्रण पाने के प्रयास करना है। इस परियोजना में प्रदेश में संचालित सभी उपयुक्त शासकीय एवं अशासकीय चिकित्सा संस्थाओं से समन्वय कर परियोजना के उद्देश्य की पूर्ति की जा रही है। इनमें राज्य एवं जिला स्तर पर सर्वेलेन्स समितियों और रेपिड रिस्पांस टीम (आर.आर.टी.) का गठन, स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तर के मेडिकल एवं पैरामैडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण, विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग सिस्टम के माध्यम से सूचना तंत्र का सुदृढ़ीकरण आई.डी.एस.पी. सर्वेक्षण यूनिट की स्थापना कर इनका क्रियान्वयन प्रमुख गतिविधियाँ शामिल हैं। परियोजना में वैक्टर जनित बीमारी जैसे मलेरिया, डेगू, चिकनगुनिया, काला-अजार दूषित जल से होने वाली बीमारियां हैजा, टायफाइड, जूनेटिक रोग (zoonotic disease), वेक्सीन से रोकथाम वाली बीमारियां खसरा, पोलियो, डिप्थीरिया, काली खांसी आदि एवं अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बीमारियों की सतत् निगरानी का कार्य राज्य एवं जिला स्तर पर किया जा रहा है। |
Friday, May 25, 2018
संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिये क्रियाशील हैं कौम्बेट दल
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