Monday, March 5, 2018

सफलता की कहानी - आजीविका समूह और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने दिलाई साहूकार से मुक्ति

आजीविका समूह और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने दिलाई साहूकार से मुक्ति "सफलता की कहानी" 
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से प्रारंभ की मुर्गी पालन इकाई, समूह से 25000 रू. ऋण लेकर साहूकार का ऋण चुकाया 
अनुपपुर | 05-मार्च-2018
 
 



   अनुपपुर जिले के जैतहरी विकासखंड के पहाड़ी एवं आदिवासी बाहुल्य ग्राम निगौरा की ऊषा साहू की आजीविका का मुख्य साधन कृषि और मेहनत मजदूरी था। एसजीएसवाय अंतर्गत गठित लक्ष्मी स्व सहायता समूह के सदस्य के रूप में विद्यालय में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से जुड़ी हुयी थी, लेकिन परिवार की आय इतनी नहीं थी कि गुजर बसर आसानी से हो पाता। घर की छोटी छोटी जरूरतों के लिए बार बार साहूकार के आगे हाथ फैलाना पड़ता था और साहूकार से लिए गये ऋण का ब्याज चुकाने में ही सारी कमाई चली जाती थी।
    इसी बीच ग्राम में म.प्र.दीन दयाल अन्त्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत समूह निर्माण एवं पूर्व से बने समूहों के सशक्तिकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। ऊषा भी आजीविका मिशन द्वारा आयोजित समूह की बैठकों में नियमित रूप से उपस्थित होने लगी एवं समूह के सदस्यों को मिलने वाले नियमित प्रषिक्षण से ऊषा के मन में कुछ करने की भावना जागृत हुयी और समूह का सहारा मिलने से आत्मविश्वास भी आया। प्रारंभ में उषा ने समूह से पांच हजार रू ऋण के रूप में लिए और कृषि कार्य में लगाया, समय से ऋण वापसी करने के बाद उसने समूह से दोबारा ऋण के रूप में पच्चीस हजार रू लिये और साहूकार का ऋण चुकता किया। साहूकार का ऋण चुकता होने के बाद ऊषा ने मुर्गी पालन गतिविधि से जु़ड़ने की इच्छा व्यक्त की और आजीविका मिशन के सहयोग से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अंतर्गत उसका मुर्गी पालन का प्रस्ताव बैंक को प्रस्तुत किया गया। बैंक ने आवष्यक औपचारिकता पूरी करते हुए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 2.50 लाख रू मुर्गी पालन इकाई हेतु प्रदान किये।
    कभी तंगहाली में जीवन व्यतीत करने वाला और साहूकार के कर्ज में दबा ऊषा का परिवार आज खुषहाली के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। ऊषा और उसके पति दोनों मिलकर मुर्गी पालन इकाई का कार्य देख रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 12 हजार रू कम से कम आय हो जाती है। ऊषा मुस्कराते हुए कहती है, आजीविका मिशन और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना मेरे लिए वरदान साबित हुयी है, आज मैं सम्मान के साथ जीवन यापन कर रही हूं और मुझे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
 

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