Monday, March 19, 2018

कृषक संगोष्ठी का आयोजन संपन्न

कृषक संगोष्ठी का आयोजन संपन्न 

अनुपपुर | 18-मार्च-2018
 
   
    कृषि विज्ञान केन्द्र, अमंरकंटक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकण्टक जिला- अनूपपुर में कृषक संगोष्ठी का आयोजन 17 मार्च 2018 को किया गया। कार्यक्रम के दोरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का कृषकों की आय दोगुनी करने हेतु उदबोधन का सीधा प्रसारण कृषि विज्ञान केन्द्र अमरकण्टक अनूपपुर में लाइव वेबकास्ट के माध्यम से किया गया। कृषक संगोष्ठी का उदघाटन श्रीमती रूपमति सिंह, अध्यक्षा जिला पंचायत अनूपपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री हीरा सिंह अध्यक्ष जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़, श्री वी.डी. नायर सहायक संचालक उद्यान, डॉ. तरूण कुमार ठाकुर नोडल अधिकारी कृषि विज्ञान केन्द्र अनूपपुर, डॉ. एस.पी. पाण्डेय पशु चिकित्सा अधिकारी व बडी संख्या में कृषक व अधिकारीगण उपस्थित रहे।
        कार्यक्रम के दौरान श्रीमती रूपमति सिंह अध्यक्ष जिला पंचायत अनूपपुर ने माननीय प्रधान मंत्री जी के कृषकों के आमदनी दुगुना करने के कार्यक्रम की सराहना करते हुये कृषकों को वैज्ञानिक तकनीक से खेती करने की तकनीक का अनुसरण करने हेतु प्रेरित किया। श्री हीरा सिंह अध्यक्ष जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ ने कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किये जा रहे कार्यक्रम कि सराहना करते हुए कृषकों से उन्नत तकनीक अनुसरण हेतु आह्वान किया तथा किसानों से कृषि के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने हुतु प्रेरित किया।
    श्री संदीप चौहान वैज्ञानिक कृषि प्रसार कृषि विज्ञान केन्द्र अनूपपुर ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र की कृषक समुदाय के विकास में भूमिका पर विस्तार से जानकारी देते हुए किसानों की आमदानी  बढ़ाने हेतु समन्वित कृषि प्रणाली, कृषि विविधीकरण, पशुपालन अपनाने हेतु प्रेरित किया। डॉ. अनीता ठाकुर वैज्ञानिक मृदा विज्ञान ने मृदा स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुये मिट्टी परीक्षण कि विधि, जैविक खेती, समन्वित पोषण प्रबंधन पर चर्चा की। अनिल कुर्मी वैज्ञानिक फसल सुरक्षा ने बीज उपचार व टीकाकरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए बीज उपचार हेतु कृषकों को प्ररित किया। सूर्यकान्त नागरे वैज्ञानिक शस्य विज्ञान ने फसलों के उन्नत किस्मों के बीजों, बीजोत्पादन की जानकारी दी। योगेश कुमार वैज्ञानिक ने एग्रो फारेस्टी ने खेती के साथ  बागवानी व  सब्जी उत्पादन हेतु प्रेरित किया। सुनील कुमार वैज्ञानिक ने फसलों के मूल्य संवर्धन व प्रसंसकरण तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी।
    डॉ. तरूण कुमार ठाकुर नोडल अधिकारी कृषि विज्ञान केन्द्र ने कुलपति डॉ. टी. व्ही. कट्टीमनी के ड्रीम प्रोजेक्ट कृषि विज्ञान केन्द्र हेतु सराहना करते हुए कार्यक्रम में पधारे सम्माननीय कृषक बन्धु अधिकारी गण आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान कृषकों हेतु प्रदर्शनी लगाई गई जिसके माध्यम से कृषकों ने उन्नत तकनीक जानकारी एकत्र की। कृषकों ने कार्यक्रम के दौरान अपनी कृषि से सम्बंधित जिज्ञासाये व्यक्त की जिसका कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन संदीप चौहान वैज्ञानिक कृषि प्रसार द्वारा किया गया।

भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर

भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर 
नदी नदी है हर नदी को हम गंगा व नर्मदा के रूप में देखें - केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर नदी संरक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत है - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, दो दिवसीय नदी महोत्सव का आज हुआ समापन 
अनुपपुर | 18-मार्च-2018
 
   
    नर्मदा नदी एवं तवा नदी के संगम स्थल बान्द्राभान में 16 मार्च से आयोजित दो दिवसीय पंचम नदी महोत्सव का गत दिवस समापन हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं खनिज श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने उपस्थित लोगों के बीच स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे का स्मरण करते हुए कहा कि मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं जिन्होने नदी महोत्सव की शुरूआत की। श्री तोमर ने कहा कि प्रकृति का नियम है कि रिक्तता समय रहते भर जाती है किन्तु श्री दवे का व्यक्तित्व एवं कृतित्व ऐसा था कि उनकी भरपाई संभव नही है। श्री दवे एक कार्यकर्ता, चिंतक, नेता एवं स्वयंसेवक के रूप में आदर्श थे। श्री तोमर ने कहा कि मां नर्मदा की महिमा अपार है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलू को सम्मान से जोड़ने की कोशिश की गई है। हमारी संस्कृति में नदियों, पर्वतों, वृक्षों, जंगल, जमीन, जल की पूजा की जाती है। यह हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होने कहा कि नदी तो नदी है हमें हर नदी को गंगा एवं नर्मदा के रूप में देखना चाहिए। प्रकृति के द्वारा जो कुछ भी जीवात्मा को प्रदान किया गया है उसकी भी प्रकृति ने एक आचार सहिता बना रखी है। प्रकृति का दोहन करने की स्वतंत्रता तो प्रकृति ने हमें दी है किन्तु यदि हम प्रकृति का शोषण करेगे तो प्रकृति हमें इसका जवाब देगी। प्रकृति के संरक्षण की व्यवस्था मनुष्य को जन्म से ही दे दी जाती है। नदी महोत्सव जैसे आयोजन होते है जहां हम नदी संरक्षण के लिए चिंतन व विचार करते है। श्री तोमर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ऐसी योजना तैयार की जाए कि जो लोग नदी संरक्षण मे बाधक है व वृक्षो का दोहन करते है उन सब को सामाजिक चेतना का ज्ञान कराया जाए। उन्होने कहा कि नदी का दोहन नीति के अनुरूप हो तो नदी का स्वरूप बिगडेगा नहीं। उन्होने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि मां के वक्ष स्थल को काटा जाए तो बच्चे का जन्म नहीं होगा। वैसे ही यदि नदी से रेत निकाली जाए तो नदी सुरक्षित नहीं रहेगी और नदी समाप्त हो जाएगी। नदी समाप्त हो जाएगी तो हम सबका जीवन भी समाप्त हो जाएगा।
       श्री तोमर ने स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे का स्मरण करते हुए कहा कि ईश्वर यदि उन्हे लंबा अवसर देता तो वह नदी एवं वन के क्षेत्र में सफलता पूर्वक कार्य कर दिखाते। उन्होने कहा कि हमारी संस्कृति में हमेशा से ही कर्म, विचार व गुण की पूजा हुई है। यदि हम विचार करे तो यह ध्यान आता है कि जब हम भगवान राम को राजा दशरथ के पुत्र के रूप में देखते है तो उनका स्मरण राजकुमार राम के रूप में करते है किन्तु जब वो 14 वर्ष के वनवास के दौरान अपने सामाजिक दायित्व को पूरा करते व मर्यादा की रक्षा करते है तो हम उन्हे भगवान श्रीराम कहकर उनकी पूजा करते है। उन्होने कहा कि स्वर्गीय दवे ने सहायक नदियो के बारे में भी विचार किया और कार्य किया। हम उनके अभियान को आगे बढाने का प्रयास कर रहे है। उनकी समग्र सोच यदि नदी संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करती है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है।
        समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए म.प्र.विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने कहा कि नदी संरक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत है। बचपन से हम यह सुनते आ रहे है कि नर्मदा मां नर्मदा है। भारत की संस्कृति में नदी संरक्षण, वृक्षों की पूजा धर्म थी किन्तु वृक्ष कटने लगे तो हमारे धार्मिक कार्य का विनाश हुआ और अब चिंता हो रही है कि हम इसे कैसे बचाएं। आदिगुरू शंकराचार्य ने मां नर्मदा को जीवित इकाई मानते हुए मां के रूप में उसकी स्तुति की। इसी को ध्यान में रखते हुए विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित कर मां नर्मदा को जीवित इकाई की श्रेणी में माना गया है। डॉ शर्मा ने कहा कि मां नर्मदा की महिमा को प्रतिपादित करने के लिए आदिगुरू शंकराचार्य ने नर्मदा अष्टक लिखा, वहीं कवि पदमाकर ने गंगा लहरी लिखी। मां नर्मदा भगवान के चरणों से आई है आज हम मां नर्मदा की अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने  के लिए निकल पडे है। भारतीय संस्कृति में सहायक नदियों का महत्व भी बताया गया है और संगम को भी महत्व दिया गया है। गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम स्थल प्रयागराज का भी महत्व है। डॉ शर्मा ने कहा कि हम सहायक नदियो को भी जोडने का प्रयास करें।
    इसके पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा व अन्य अतिथियों को स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे द्वारा लिखित पुस्तक एवं छिंदवाडा में बनी उत्तरीय भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध फोटोग्राफर श्री मुकुल यादव के द्वारा मां नर्मदा के उद्गम स्थल से लेकर यात्रा तक के जीवंत फोटो के कैलेन्डर को विमोचन किया गया। बताया गया कि दो दिवसीय नदी महोत्सव में आये गये सुझाव को एक साराश एवं स्मारिका में प्रकाशित किया जाएगा।
    समापन अवसर को संबोधित करते हुए सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पंचम नदी महोत्सव सही मायने में आने वाले समय में हमारी पीढियों को मार्ग दिखाने का कार्य करेगी। उन्होने कहा कि मेरी नर्मदा आयोजन में सहभागिता स्वर्गीय अनिल माधव दवे जी की प्रेरणा के कारण रही है। उनकी कल्पना आज मूर्त रूप ले रही है और हमें इस कल्पना को समर्पित भाव से आगे बढ़ाना है। सांसद ने कहा कि आज हम सब दवे जी को याद कर मां नर्मदा को साफ रखने का संकल्प लेंगे। श्री राव ने कहा कि मां नर्मदा हमें इतनी सामर्थता दे कि हम सब दवे जी के सपने को साकार कर सके।
    श्री शैलेन्द्र शर्मा ने आयोजित नदी महोत्सव कार्यक्रम पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डालते हुए बताया कि इस बार आयोजन मंडल ने तय किया है कि श्री दवे जी के नाम से इस परिसर का नाम रखा जाएगा। उन्होने नदी महोत्सव कार्यक्रम में सहयोग करने वाली सभी संस्थाओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने कहा कि नदी संरक्षण पर कार्य कर रही सभी संस्थाओं को नर्मदा समग्र से जोडा जाएगा। उन्होने बताया कि पंचम नदी महोत्सव में 175 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। सामुदायिक नेतृत्व के 306 छात्र-छात्राओ ने इस आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई। राजीव गांधी प्रोद्योगिकी संस्था के 35 छात्र, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 25 विद्यार्थियो ने प्रदेश के बाहर के 30 विद्यार्थियो ने यहां आकर नदी संरक्षण पर चिंतन एवं मनन किया। इसके अलावा 380 प्रतिभागी इस आयोजन में शामिल रहे।
    समापन कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पांडे ने आभार व्यक्त किया।
   समापन कार्यक्रम के अवसर पर संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत, सचिव दीनदयाल शोध संस्थान नई दिल्ली श्री अतुल जैन, भाजपा उपाध्यक्ष श्री बृजेश लुनावत, जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री राघवेन्द्र गौतम, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री कुशल पटेल, श्री अनिल पिल्ले, पूर्व मंत्री श्री मधुकर राव हर्णे, बैरसिया विधायक श्री विष्णु खत्री, सोहागपुर विधायक श्री विजयपाल सिंह, पिपरिया विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी, म.प्र.खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, श्री अभय दवे, जनप्रतिनिधिगण, प्रतिभागी, नर्मदा संरक्षण पर कार्य रही सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

पंचम नदी महोत्सव का हुआ समापन

पंचम नदी महोत्सव का हुआ समापन 
 
अनुपपुर | 18-मार्च-2018
 
   
    पंचम नदी महोत्सव का गत दिवस समापन किया गया। समापन अवसर पर जनअभियान परिषद के कार्यकर्ता, प्रस्फुटन समिति के सदस्यगण, नदी संरक्षण पर कार्य कर रही सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि गणों एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक बैठक में अपने अनुभव सभी से साझा किए। इस अवसर पर मौजूद उत्तमस्वामी ने कहा कि यदि हमें जीवन में कुछ करना है तो नदी का संरक्षण अनिवार्य रूप से करें। पूरे ब्राहमांड में माता नर्मदा श्रेष्ठ पद पर विराजी है। हमारे वेद में नदियो को देव माना गया है और पूरे भारत में नदियों की पूजा की जाती है। उन्होने कहा कि यदि हम नदी का संरक्षण करते है तो इससे बड़ा पुण्य का कोई कार्य नहीं है। हम नदियों में जाते तो अवश्य है किन्तु नदी की सफाई नहीं करते है। नदी तो परोपकार करती हुई बहती है। हम सब नदी को पुण्यात्मा मानकर कार्य करें। यदि हम एक व्यक्ति को भी नदी में कचरा डालने से रोक ले तो यह अपने आप में बद्रीनाथ एवं केदारनाथ की यात्रा करने के बराबर होगा। यदि हम नदी को संरक्षित कर ले तो यह हजारो माला का जाप करने के बराबर होगा। यदि हम मन व बुद्धि से स्वर्गीय श्री अनिल माधव दवे जैसा संकल्प ले कि हम आज से प्रतिदिन 5 लोगो को नदी में कचरा डालने से रोके और प्रतिदिन एक घण्टा नदी के समीप बिताएं।
        समापन अवसर पर प्रतिभागियो ने भी अपने कथन एवं विचार से सभी को अवगत कराया। खरगोन एक प्रतिभागी ने बताया कि मण्डलेश्वर में प्रतिदिन सफाई का कार्य किया जा रहा है लेकिन जितना हम नदी को साफ करते है लोग उतनी ही गंदगी वहां डाल देते है। लोगो को रोकने पर वे कहते है कि पहले शहर के नाले साफ करें। सिवनी के ग्राम जाम के एक प्रतिभागी ने बताया कि उन्होने अपने गांव की नदी पर पशुओ के पानी पीने के लिए अलग स्थान बना दिया है। कचरा एवं गंदगी डालने के लिए एक स्थान निश्चित किया है। रीवा के प्रतिभागी विक्रांत द्विवेदी ने बताया कि उन्होने बिछुआ नदी पर कार्य किया है पहले नदी में कचरा एवं गंदगी थी उन्होने कुछ लोगो को जागरूक कर नदी के उद्गम स्थल से लेकर संगम तक का सर्वे कर, पद यात्रा कर लोगो को जागरूक किया। पहले वर्ष 21 दिन का श्रमदान किया गया, दूसरे वर्ष 61 दिन का, तीसरे वर्ष 100 दिन का श्रमदान किया गया। इससे लोग आकर्षित हुए और नदी साफ सुथरी हुई। वर्तमान में एक करोड की कार्य योजना बनाई गई है। नदी में फूल एवं नारियल का विर्सजन प्रतिबंधित किया गया है। मांडू से आये एक प्रतिभागी ने बताया कि रेवा कुण्ड स्थान पर प्रति वर्ष परिक्रमा वासी आते है आने का रास्ता तो ठीक है किन्तु उतरने का रास्ता कठिन है। उन्होने उतरने के रास्ते को सुगम बनाने की मांग की। उमरिया जिले के बांधवगढ के एक प्रतिभागी ने बताया कि उनके ग्राम से चरण गंगा नदी बहती है जो आगे जाकर टोक नदी में मिलती है। उन्होने नदी पर छोटे-छोटे बोरी बंधान किये है इससे वर्ष भर पानी गांव वालो को मिलता है। इससे 300 एकड जमीन भी सिंचित हो रही है। उज्जैन से आए विकास पाठक ने बताया कि सरकारी तंत्र के कारण क्षिप्रा नदी में कई प्रकार की समस्याएं आ रही है और जैव विविधता नष्ट हो रही है। उज्जैन में कई तालाब को पूर कर सड़क बनाई जा रही है, जल स्त्रोतो पर भी सड़क का निर्माण हो रहा है। जैवंती नदी का स्वरूप भवनो के निर्माण से बिगड रहा है। मंडला के प्रतिभागी श्री राकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होने सहोदर नदी को गोद लिया है यह नदी महादेव पहाडी से निकलती है उन्होने गांव में बैठक कर लोगो को नदी संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया है। नदी में 400 स्क्वेयर फीट का गड्ढा किया जिससे पानी रूक गया है। अब गांव वालो को पशुओ के पानी के लिए ईधर उधर भटकना नहीं पडता है।
        उमरिया के जयसिंह ने बताया कि उन्होने गांव की नदी में बोरी बंधान का कार्य किया इससे नदी का जल स्तर बढ गया। श्योपुर कलां के नरेश कुमार ने बताया कि गांव की नदी में लगातार मिट्टी इक्टठा हो रही थी गांव वालो की मदद से मिट्टी को नदी मे जाने से रोका गया है इससे पानी का प्रवाह बढ़ा और पानी साफ भी हुआ। श्योपुर कलां के ही नीतेश शर्मा ने बताया कि धन्वन्ती नदी पर श्रमदान कर उसका गहरी करण कर जल के स्तर को बढ़ाया गया। गुना के कृष्णकुमार ने बताया कि उन्होने नदी जोडो अभियान के तहत गांव-गांव बैठक कर नदी में बोरी बंधान बनाए और चेक डेम बनाए इससे अब वर्ष भर पानी रहता है। मंडला के डॉ गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि उन्होने नादिया नदी पर कार्य किया है गांव वाले पहले नादिया को नदी ना मानकर महज नाला मानते थे। प्रथम चरण में इस नदी के उद्गम स्थल से लेकर संगम स्थल तक सर्वे कर और श्रमदान के माध्यम से बोर बंधान किया गया आसपास वृक्षारोपण किया गया। जबलपुर के श्री विनोद शर्मा ने कहा कि वे नदी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे है। उन्होने नई नदी नीति में नदी को प्रदूषित करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करने की मांग की। उन्होने बताया कि उन्होने पैरियट नदी पर कार्य किया है। उन्होने कहा कि यदि हम छोटी-छोटी शिशु नदी पर कार्य करेगे तभी बडी नदियां बच पाएगी। राजस्थान से आई श्रीमती कमला मीणा ने बताया कि उन्होने सर्व प्रथम कुए के पानी को साफ किया और उसका जल स्तर बढ़ाया। इनकी देखादेखी गांव की अन्य महिलाओ ने भी कुओं के संरक्षण पर कार्य करना शुरू किया। आज उनके टोक जिले में छोटी नदियों में प्रतिवर्ष पानी रहता है।
        रीवा के श्री अखिलेश कुमार ने पुरवई नदी पर सीहोर के शंभु सिंह ने नर्मदा नदी पर किए गये अपने कार्य की विस्तार से जानकारी दी। शहडोल, डिंडोरी, बालाघाट, जबलपुर, मुरैना से आए हुए प्रतिभागियो ने भी नदी संरक्षण के लिए किए गए अपने कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर नर्मदा समग्र द्वारा नदी महोत्सव पर बनाई गई लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर संगठन मंत्री श्री सुहास भगत, म.प्र.खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, श्री हरिशंकर जायसवाल मौजूद थे।

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