Tuesday, March 6, 2018

‘रेरा’ के प्रतीक चिन्ह का अनाधिकृत उपयोग करने पर होगी कार्यवाही

‘रेरा’ के प्रतीक चिन्ह का अनाधिकृत उपयोग करने पर होगी कार्यवाही 
अनुपपुर | 06-मार्च-2018
 

    भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण एक मई 2017 से अस्तित्व में आया है। प्राधिकरण द्वारा एक मई से ही अपना लोगो अपना लिया गया है। प्राधिकरण द्वारा लोगो का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों में ही किया जाता है। रेरा के नाम तथा लोगो के अनाधिकृत उपयोग करने वालों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
    मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मध्यप्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण श्री प्रदीप जैन ने कहा है कि कुछ सलाहकारी फर्मों द्वारा रियल स्टेट प्रमोटर्स को रेरा के अधिकृत सलाहकार बनकर उन्हें विभिन्न रिटर्न फाईल एवं पंजीयन के लिए सेवायें देने के प्रस्ताव पर रेरा के लोगो का उपयोग किया जा रहा है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। इसी प्रकार कुछ व्यक्तियों द्वारा अपनी फर्म की वेबसाइट का नाम रेरा एवं लोगो के साथ दिखाया जा रहा है। इससे भ्रम उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने बताया है कि प्राधिकरण द्वारा अपने हितधारकों के हितों के रक्षार्थ इस प्रकार भ्रम फैलाने वाले व्यक्तियों व फर्मो को नोटिस जारी किये गए हैं। रेरा कार्यालय द्वारा सभी हित धारकों को सचेत किया गया है कि रेरा द्वारा किसी भी व्यक्ति, फर्मो व कंपनियों को सलाहकारी कार्यों के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। इस प्रकार रेरा के नाम तथा लोगो के अनाधिकृत उपयोग से भ्रमित न हों।

सफलता की कहानी - कृषि एवं सब्जी उत्पादन से हरा-भरा हुआ इन्द्रवती का परिवार

कृषि एवं सब्जी उत्पादन से हरा-भरा हुआ इन्द्रवती का परिवार 
अनुपपुर | 06-मार्च-2018
 
  

     अनूपपुर जिले के कोतमा ब्लाक मुख्यालय से 26 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम रेउसा में निवास करने वाली इन्द्रवती अपने परिवार का भरण पोषण कृषि एवं मजदूरी से प्राप्त आय से कर रही थीं, परिवार की आजीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि था लेकिन सिंचाई की सुविधा न होने के कारण प्राकृतिक बारिश पर निर्भरता बनी रहती थी। पर्याप्त बारिश नहीं होने पर आजीविका का मुख्य सहारा पति की मजदूरी ही थी, लेकिन आज के समय में मजदूरी कर परिवार पालना इतना आसान नहीं था।
    म.प्र.दीन दयाल अन्त्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ग्रामीण गरीब परिवारों की आजीविका सदृढ़ करने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं, जिसके पास जो संसाधन है, उसी के उचित उपयोग एवं तकनीकी ज्ञान बढ़ाकर किये जा रहे कार्य को लाभ का धंधा बनाकर परिवार की आजीविका संवहनीय बनाना मिशन की प्राथमिकताओं में है। इन्द्रवती के पास कृषि योग्य 4 एकड़ जमीन तो थी पर सिंचाई की व्यवस्था नही थी। इंद्रवती ने सबसे पहले अपने समूह से रू. 5000/- का ऋण बीज के लिये ली और फसल आने के बाद ब्याज सहित वापस कर भी कर दिया।  इसके बाद इंद्रवती ने अपने पति और परिवार के साथ सलाह कर अपने खेत में ट्यूबवेल के लिये 70000 रू का ऋण अपने समूह से लिया, खेत पर ट्यूबबेल हो जाने के बाद तो कृषि कार्य बारहों महीने होने लगा और पानी की उपलब्धता होने के कारण व्यावसायिक सब्जी उत्पादन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया। इंद्रवती के खेत की सब्जी पहले गांव, फिर गांव से आसपास के हाट बाजारों तक बिकने लगी और पर्याप्त लाभ होने लगा। सब्जी व्यवसाय से होने वाले लाभ से परिवार का हौसला बढ़ा और अब सब्जी उत्पादन इंद्रवती का मुख्य व्यवसाय बन गया है। कृषि और सब्जी उत्पान से औसतन प्रतिमाह रू. 11000/- की आय होने लगी है।
    पांचवी तक पढ़ी हुई इन्द्रवती ने कभी नही सोचा भी नहीं था कि मजदूरी छोड़ कर खुद का अपना कोई व्यवसाय होगा, आजीविका मिशन के सहयोग से समूहो में संगठित होकर कई अन्य परिवारों की तरह इन्द्रवती का परिवार भी आजीविका गतिविधि से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है। समूह से जुड़ने के बाद समाज में भी एक पहचान बन गई है, वर्तमान में इन्द्रवती अपने समूह रामभजन मंडली स्व सहायता समूह के माध्यम से गांव के गरीब परिवार की महिला सदस्यो के लिये मार्गदर्शक बनकर सभी को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कर रही है। 

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति का गठन

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति का गठन 
अनुपपुर | 06-मार्च-2018

 
    मुख्य सचिव श्री बसंत प्रताप सिंह की अध्यक्षता में मिशन अंत्योदय की संस्थागत व्यवस्था हेतु राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति का गठन किया गया है। समिति में विकास आयुक्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को संयोजक तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को सदस्य सचिव मनोनीत किया गया है।
    समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वित्त, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उर्जा, अनुसूचित जाति कल्याण, आदिम जाति कल्याण, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल, सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन, स्कूल शिक्षा, मछुआ कल्याण व मत्स्य विकास, पशुपालन, महिला बाल विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, आयुक्त पंचायत तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सदस्य होंगे। समिति आवश्यकतानुसार अन्य को सदस्य के रूप में सहयोजित कर सकेगी।
    मिशन अंत्योदय की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति द्वारा आयोजना, कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण हेतु नीति, प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों का निर्धारण तथा आवश्यकता अनुसार संशोधन, अभिसरण और सकेन्द्रित कार्यान्वयन हेतु सहभागी विभागों के संस्थागत सहयोग तथा वित्तीय संसाधनों तथा योजनाओं/कार्याकलापों का निर्धारण, सहभागी विभागों के दायित्वों का निर्धारण, अंतर्विभागीय समन्वय, जिलों द्वारा अवगत कराये गये मुद्दों पर विचार-विमर्श एवं आवश्यक अनुशंसा, कठिनाईयों के निराकरण हेतु प्रशासकीय और तकनीकी सहयोग तथा समन्वय, वैकल्पिक वित्त पोषण हेतु अनुशंसा, राष्ट्र स्तर की समिति से आवश्यक समन्वय, विभाग वार प्रगति तथा परिणामों (Outcome) का अनुश्रवण किया जावेगा।
    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय के द्वारा चलाये जा रहे मिशन अंत्योदय का प्रमुख उद्देश्य शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों के समन्वय व तालमेल से उपलब्ध मानव और वित्तीय संसाधनों का अभिसरण-(Convergence) व इष्टतम उपयोग (Optimum Utilization) कर ऐसे कार्यकलापों/योजनाओं का सकेन्द्रित कार्यान्वयन (Focused lmplementation) करना है, जिससे गरीबी के बहुआयामी स्वरूप (Multidimensionality Of Poverty) पर प्रभावी व परिणाम मूलक कार्यवाही की जाकर लक्षित परिवारों हेतु संवहनीय आजीविका( Sustainable Livelihood) सुनिश्चित की जा सके।

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