Tuesday, August 28, 2018

पति को खोने के बाद भी दुलसिया के आत्मनिर्भर रहने की सोच को मिला आजीविका का साथ स्वयं के रोज़गार से कर रही हैं परिवार का लालन पालन

सफलता की कहानी
पति को खोने के बाद भी दुलसिया के आत्मनिर्भर रहने की सोच को मिला आजीविका का साथ
स्वयं के रोज़गार से कर रही हैं परिवार का लालन पालन

अनूपपुर 28 अगस्त 2018/ महिलाएँ जितनी संवेदनशील, भावुक एवं सरल होती हैं उतनी ही वो दृढ़ निश्चयी एवं कर्तव्यपरायण होती हैं यह सब हमने कहानियों में तो बहुत पढ़ा है। अक्सर ही हम उनके साहस से मुख़ातिब भी होते रहते हैं। शायद इसीलिए ये कहानियाँ अब कहानियाँ न होकर एक सच्चाई हैं सामाजिक आइना है। ऐसे ही दृढ़ निश्चय की कहानी है अनूपपुर नगरपालिका की निवासी दुलसिया बाई की। जब दुलसिया से उनके पति का साथ छूटा तब उनके ऊपर तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी थी। स्वावलंबी दुलसिया  नही चाहती थीं कि बच्चों के लालन पालन के लिए वे किसी के सामने हाथ फैलाएँ। परंतु घर को कैसे चलाएँ ये उन्हें नहीं समझ आ रहा था। तभी दीनदयाल अन्त्योदय शहरी आजीविका मिशन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें सिलाई मशीन के प्रशिक्षण के बारे में बताया। दुलसिया ने एक माह चले सिलाई कोर्स में सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। आजीविका कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के बारे में बताया गया। दुलसिया ने आर्थिक कल्याण योजना के माध्यम से 50 हज़ार रुपए का ऋण लिया इस राशि में से 12 हज़ार 500 रुपए उन्हें अनुदान के रूप में प्राप्त हुए। दुलसिया बाई ने नगरपालिका अनूपपुर द्वारा स्थापित हॉकर्स ज़ोन में सिलाई एवं प्लास्टिक के सामान की दुकान खोली। आज दुलसिया आत्मनिर्भर होकर बिना किसी दबाव के अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। अब वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी पर आश्रित नही हैं। दुलसिया शासन को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि अगर सोच अच्छी हो तो किसी भी समस्या से बाहर निकला जा सकता है शासन सभी लोगों को समस्याओं से निकालने के लिए सदैव खड़ी है। आप कहती हैं मनुष्य को कभी भी हार नही माननी चाहिए समस्याओं से निकलने के कई रास्ते होते हैं बस सही मार्गदर्शक मिलना चाहिए। आप शहरी आजीविका मिशन एवं नगरपालिका अनूपपुर को धन्यवाद देती हैं।

आजीविका के सहयोग से रितेश की बेरोज़गारी हुई दूर अपने आप पर रखे भरोसा रोज़गार देने वाले बने

सफलता की कहानी
आजीविका के सहयोग से रितेश की बेरोज़गारी हुई दूर
अपने आप पर रखे भरोसा रोज़गार देने वाले बने

अनूपपुर 28 अगस्त 2018/ जब कोई बच्चा बड़ा होता है तो अपने मन में बहुत से स्वप्न रखता है वो सोचता है मैं बड़ा होकर अपने माँ पिता को बेहतर जीवन दूँ। इस हेतु वह कठिन से कठिन प्रयास करने से भी नही घबराता मेहनत करने से पीछे नही हटता। ऐसा ही स्वप्न नगरपालिका अनूपपुर के निवासी रितेश खंडेलवाल ने भी देखा था। परंतु स्वप्न और हक़ीक़त के अंतर से मुलाक़ात होने में शायद कुछ जल्दी हो गयी। रितेश परेशान रहने लगे जब उन्हें समझ में आया मेहनत के साथ पूँजी भी विकास की राह में अति आवश्यक है। अच्छी सोच के साथ संसाधनों का होना भी उतना ही आवश्यक है। रितेश ने मेहनत तो कि परंतु स्थायित्व के अभाव में अक्सर ही नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। क्षेत्र में सक्रिय दीनदयाल अन्त्योदय शहरी आजीविका मिशन कार्यकर्ताओं ने जब रितेश की ऊर्जा को देखा तो उन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना के बारे में बताया। रितेश की तो जैसे बिन माँगे ही मुराद पूरी हो गयी। रितेश को मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना के तहत 2 लाख रुपए का ऋण जिसमें 40 हज़ार का अनुदान था प्राप्त हुआ। रितेश ने उन पैसों से जुते चप्पल की दुकान खोली। आज वो पूरी मेहनत से व्यवसाय को सुचारू रूप से चला रहे हैं। रितेश कहते हैं वो बहुत बड़े व्यापारी तो नही हैं परंतु शासन के सहयोग ने उस राह की सम्भावनाओं को पैदा कर दिया है। वे इसी प्रकार मेहनत कर उस मुक़ाम को ज़रूर हासिल करेंगे। आप ज़िले के युवाओं को सलाह देते हैं कि अब किसी को रोज़गार के लिए भटकने की ज़रूरत नही है। अपने आप पे भरोसा रखे और रोज़गार देने वाले बने शासन आपके साथ है।

मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना से रवि बने आत्मनिर्भर आजीविका के सहयोग से खोली वेल्डिंग वर्कशॉप

सफलता की कहानी
मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना से रवि बने आत्मनिर्भर
आजीविका के सहयोग से खोली वेल्डिंग वर्कशॉप

अनूपपुर 28 अगस्त 2018/ देश के विकास के लिए यह आवश्यक है कि वहाँ के निवासी विकास की प्रक्रियाओं में भागीदार बने उत्पादक बने। इस सोच को मूर्तरूप देने के लिए नागरिकों का सक्षम होना आवश्यक है। कई बार सक्षम होने के बाद भी प्रारम्भिक पूँजी के अभाव में कई लोगों को अपने स्वप्न के साथ समझौता करना पड़ता है और वे दूसरों पर आश्रित होकर किसी प्रकार अपना गुज़र बसर कर पाते हैं। परंतु दीनदयाल अन्त्योदय शहरी आजीविका मिशन ने नगरपालिका अनूपपुर के वार्ड क्र 13 के निवासी रवि को मजबूर नही रहने दिया। मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजनांतर्गत रवि को 2 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ जिसमें 40 हज़ार रुपये की अनुदान राशि थी। इस राशि के प्रयोग से रवि ने स्वयं की वेल्डिंग वर्कशॉप खोली। रवि कहते हैं आज वो स्वयं अपनी मेहनत के मालिक हैं उनकी की हुई मेहनत का फल अब उन्हें ही मिलता है। रवि कहते हैं उन्हें काम तो आता था पर प्रारम्भिक पूँजी के अभाव में उनकी सोच वास्तविकता के धरातल में नही आ पा रही थी। तभी नगरपालिका अनूपपुर द्वारा आपको मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना के बारे में जानकारी दी गयी और आज वो सपना हक़ीक़त बन चुका है। रवि कहते हैं वो और मेहनत करके अपने इस व्यवसाय को ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। आप मध्यप्रदेश शासन को धन्यवाद देते हुए युवाओं को समझाइश देते हैं कि अब अपने स्वप्न को दबायें नही शासन के सहयोग से उसे मूर्तरूप देने में जुट जाएँ।

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