Friday, June 15, 2018

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर आजीविका परियोजना ने बढाए रोजगार के अवसर

सफलता की कहानी
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
आजीविका परियोजना ने बढाए रोजगार के अवसर



अनूपपुर 15 जून 2018/ लोगों के विकास का सर्वश्रेष्ठ तरीका है, उन्हे स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त करना।उन्हे रोजगार के साधन उपलब्ध कराना ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपनी समस्त जिम्मेदारियों की पूर्ति सामाजिक सम्मान एवं प्रतिष्ठा के साथ कर जीवन मे आगे बढ्ने के हर अवसर को प्राप्त कर सकें। म.प्र. डे ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा लोगो को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त करने का कार्य किया जा रहा है। सहयोग से स्वावलंबन स्वरोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य हैं। इससे नागरिकों मे आत्मविश्वास का संचार होता है यह आत्मविश्वास उन्हे प्रगति पथ मे सदैव आगे बढ़ते रहने मे सहायक होता है।
जनपद जैतहरी के ग्राम खूंटाटोला की पवन कुमारी की स्वावलंबन की कहानी मे आवश्यक सहारा म.प्र. डे ग्रामीण आजीविका मिशन ने प्रदान किया। पवन कुमारी बताती हैं कि म प्र ग्रामीण आजीविका परियोजना के माध्यम से स्व रोजगार के लिये मैने पचास हजार रुपये का लोन वैष्णवी स्व सहायता समूह से लिया ऒर घर पर ही यह दुकान खोल ली। अब दुकान चल निकली तो इतना लाभ मिल रहा है कि महीने की किस्त पटाने के बाद घर खर्च के लिये पर्याप्त पैसा बच जाता है। पवन कुमारी के अनुसार क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी स्व सहायता समूह से लोन लेकर मनिहारी,सब्जी,किराना,मुर्गीपालन हेतु आदि का व्यवसाय प्रारम्भ किया है। सभी बेहतर कार्य कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र की यह तस्वीर सुखद है जहाँ महिलाएं ग्रामीण आजीविका परियोजना की मदद से आत्मनिर्भरता की ओर बढ रही हैं। इसके लिये विभाग व सरकार की लोग मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं।



कलेक्टर की रेड आर्मी दे रही है स्वच्छता की समझाइश

कलेक्टर की रेड आर्मी दे रही है स्वच्छता की समझाइश
कलेक्टर एवं सीईओ जिपं समेत जिलाधिकारियों ने तड़के पढ़ाया स्वच्छता का पाठ



अनूपपुर 15 जून 2018/ ज़िले को भौतिक एवं व्यवहारिक रूप से खुले मे शौच मुक्त कर स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के अभियान मे ज़िला प्रशासन का हर एक विभाग शामिल हो चुका है। अधिकारियों के साथ मैदानी अमला भी इस आशय के सतत प्रयास कर रहा है। कलेक्टर श्रीमती अनुग्रह पी के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना के कुशल नेतृत्व मे समस्त विभागों के जिलाधिकारी, विकासखंड अधिकारी एवं मैदानी अमला पूरे ज़िले मे स्वच्छता अभियान को सफल बनाने हेतु सक्रिय है। इसी क्रम मे जनपद जैतहरी की ग्राम पंचायत हर्री मे कलेक्टर एवं सीईओ जिपं समेत ज़िले के विभिन्न विभागो के जिलाधिकारी प्रातः  5 बजे पहुचे एवं ग्रामवासियों को समझाइश दी।
इज्जत बड़ी है या शौचालय की लागत - कलेक्टर 
कलेक्टर श्रीमती अनुग्रह पी ने ग्रामवासियों से चर्चा के दौरान कहा सिर्फ शौचालय के निर्माण एवं उसके उपयोग के लिए संसाधनो का न होना समझ से परे है। शौचालय के उपयोग के प्रति उदासीनता स्वच्छता की समझ न होने को निरूपित करती है। एक सभ्य व्यक्ति से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती। आपने सभी ग्रामीणो से कहा  सिर्फ सोच सकारात्मक करें रास्ते दिखने प्रारम्भ हो जाएंगे।शादी विवाह मे हम इतना खर्च करते हैं, महंगे मोबाइल रखते हैं इन सब चीज़ों के लिए संसाधन जुटा लेते हैं बस शौचालय के लिए साधन नहीं जुटा पाते। आपने ग्रामीणो से पूछा क्या शौचालय की लागत इज्जत से बड़ी है। सभी ग्रामीणो ने जवाब दिया नहीं इज्जत का कोई मूल्य नहीं और सबने प्रण लिया सब मिलकर ग्राम पंचायत को खुले मे शौच मुक्त बनाएँगे।
एक व्यक्ति भी अगर खुले मे शौच करता है तो उसका खामियाजा पूरे समुदाय को भुगतना पड़ता है - डॉ सिडाना
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना ने ग्रामीणो को खुले मे शौच से होने वाले दुष्प्रभावो एवं बीमारियों की जानकारी दी और कहा कि ये रोगाणु क्षेत्र मे किसके घर मे शौचालय है किसके घर मे नहीं है इसमे भेद नहीं करते सभी के लिए समान रूप से घातक हैं। अगर एक व्यक्ति भी खुले मे शौच करता है तो बीमारियो का खतरा बना रहेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी लोग समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझे और अपने मनुष्य होने का परिचय देते हुए पंचायत को खुले मे शौच मुक्त बनाए।
स्वच्छता अभियान मे सीईओ जनपद जैतहरी श्री एस के वाजपेयी ,स्वच्छ भारत मिशन  के ज़िला संयोजक श्री रामनरेश वर्मा, विकासखंड संयोजक श्री पुष्पेंद्र तिवारी समेत विभिन्न विभागो के जिलाधिकारी उपस्थित थे।


अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष श्रृंखला ( द्वितीय विचार) योग जीवन का हिस्सा नहीं जीवन जीने का तरीका है

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष श्रृंखला ( द्वितीय विचार)


योग जीवन का हिस्सा नहीं  जीवन जीने का तरीका है



अनूपपुर 15 जून 2018/  योग को परिभाषित करने अथवा समझने से पूर्व यह आवश्यक है की पहले जीवन को समझा जाय। अगर सामान्य शब्दो मे कहा जाय तो जन्म से लेकर मृत्यु के बीच का समय जीवन कहलाता है। पेढ पौधों मे भी जीवन होता है। यहाँ यह विचारणीय है की जड़ और चेतन को क्या सिर्फ गतिशील होना ही अलग करता है। नहीं , चेतन जीवों मे जो विवेक होता है , जो विचारण क्षमता होती है वह जड़ जीवों की तुलना मे अधिक जागृत होती है। यही विवेक ही मनुष्य को जानवरो से भी अलग करता है। यह क्षमता बहुत शक्तिशाली  है, जहां एक ओर यह परेशानियों से मुक्ति दिलाती है , विकट परिस्थितियों मे सही मार्ग का चयन करने मे सहयोग प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर इसका संतुलन बनाकर रखना भी एक दुष्कर कार्य है। यह अन्तर्मन भौतिक सुख सुविधाओं से परे है। अगर मनुष्य के पास संसाधनों की कमी है तो कभी कभी उसे ऐसा आभास होता है कि किंचित सुविधाओं के न होने की वजह से उसका चित्त अशांत है। परंतु ऐसा वास्तव मे होता नहीं है , धनाढ्य व्यक्ति भी चित्त की गति से परेशान हैं। यहाँ यह प्रश्न उठता है कि सुखमय जीवन जीने का आखिर उपाय क्या है? यह हमारे लिए गौरव की बात है कि इस जटिल प्रश्न का हल हमारे भारत वर्ष के पूर्वजों द्वारा ढूंढ लिया गया है। सिंधु घाटी की सभ्यता मे भी इसके अभ्यास के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इसका हल है योग साधना के माध्यम से साधक के शरीर, मन एवं कर्मो का एकीकरण । जो हम सोचते वह भी परिष्कृत हो, जो हम चाहते हैं वो भी परिष्कृत होकर उत्तम हो। हमारे शरीर मे उस कार्य को करने की क्षमता हो और हमारा आचरण भी उसी दिशा मे हो।ये समस्त कार्य करने का उपाय योग मे है। योग मे वह शक्ति है जो 'मनसा वाचा कर्मणा' का एकीकरण कर सकती है। योग के माध्यम से मनुष्य अपने अंदर छुपी हुई असीम ऊर्जा को जागृत कर सकता है अपने मन पर नियंत्रण लाकर उस ऊर्जा का उपयोग सही रास्ते मे कर सुखमय जीवन जी  सकता है।
योग एक अभ्यास है , एक साधना है यह जीवन का हिस्सा नहीं वरन स्वस्थ, सुखमय एवं शांतिपूर्वक जीवन जीने का तरीका है। भारत की इस अद्भुत विरासत को पूरे विश्व ने समझा और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप मे इसके महत्व को निरूपित किया। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि सिर्फ  ज्ञान का होना और उसे बाटना पर्याप्त नहीं है। उसे आत्मसाथ करना ही उस ज्ञान का मूलभूत लक्ष्य है। अगर हमारे मन, वाणी एवं कर्म एकीकृत नहीं है, और हम अपने बताए गए ज्ञान से खुद ही लाभान्वित नहीं हो रहे हैं तो हम खुद ही अपनी इस धरोहर के मूल को क्षति पहुंचा रहे हैं। आइये हम सब प्रण करे योग को आत्मसाथ कर अपने जीवन को सार्थक बनाएँगे। योग से मन मे नियंत्रण कर विचारों को परिष्कृत कर  समस्त विश्व मे शांति, भाईचारे एवं सौहार्द के प्रणेता बनेगे।

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