| परिजनों की तरह नागरिकों की स्वास्थ्य चिंता करते हैं मुख्यमंत्री - रुस्तम सिंह |
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| अनुपपुर | 04-मार्च-2018
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अपने प्रशासनिक और राजनैतिक जीवन में मैंने कई मुख्यमंत्री देखे। श्री शिवराज सिंह चौहान उनसे बिल्कुल भिन्न मुख्यमंत्री हैं। आदत थी मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की। श्री चौहान व्यक्ति पहले हैं मुख्यमंत्री बाद में। श्री चौहान के लिये मुख्यमंत्री पद के मायने हैं गरीब, कमजोर तबकों के उन्नयन के साथ प्रदेश का सर्वांगीण विकास। स्वास्थ्य विभाग की बैठकों में मैंने पाया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के नागरिकों खासतौर से गरीब लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान कुछ इस तरह रखते हैं जैसे वे उनके घर-परिवार के ही लोग हों।
मध्यप्रदेश में पिछले 14 सालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में न केवल अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए नवाचारों में भी प्रदेश देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री की चिंता का ही परिणाम है कि प्रदेश में आज लाखों रुपये के खर्च वाले हृदय, किडनी, कैंसर आदि बड़े-बड़े रोगों के इलाज और दवाएँ आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से लेकर वृद्धजनों तक सभी के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा रहा है। मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिये प्रदेश में अभिनव पहल करते हुए स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। दस्तक अभियान में ये टीमें घर-घर जाकर कुपोषित-अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उनके इलाज और पोषण का प्रबंध कर रही हैं। वर्ष 2017-18 के प्रथम चरण में 76 लाख 68 हजार बच्चों की जाँच की गई। इनमें से 15 हजार 349 गंभीर कुपोषित बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर उपचार कराया गया। गंभीर ऐनीमिक 8,726 बच्चों की पहचान की जाकर 1476 बच्चों को खून चढ़ाया गया। साथ ही 63 लाख 24 हजार बच्चों को विटामिन श्एश् की खुराक दी गई। सघन मिशन इन्द्रधुनष अभियान में अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 तक 14 जिलों में 2 लाख 82 हजार टीकाकरण से छूटे हुए बच्चों का और 59 हजार 730 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। वर्ष 2017-18 में महिला स्वास्थ्य शिविरों में 21 लाख महिलाएँ लाभान्वित हुईं। मुझको विश्वास है कि इन प्रयासों से भविष्य में सुखद परिणाम मिलेंगे। निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। मध्यप्रदेश के 51 जिलों में से 38 जिलों को एक से 18 वर्ष तक के बच्चों को कटे होंठ एवं फटे तालु से मुक्त घोषित किया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 71 हजार से अधिक बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें 8 लाख 63 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पाये गये। इनमें से 6 लाख 51 हजार बच्चों को उपचारित और 16 हजार 294 की निःशुल्क सर्जरी की गई। मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना में 1160 बच्चों की हृदय चिकित्सा, मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना में 373 बच्चों की कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी कराई गई। इन पर खर्च होने वाला लाखों का खर्चा शासन ने उठाया। राज्य बीमारी सहायता निधि से पिछले साल 10,100 हितग्राहियों पर 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई। इस वर्ष दिसम्बर तक निधि में 60 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में कैंसर रोगियों को निःशुल्क कीमोथेरेपी सुविधा दी जा रही है। अब तक करीब 20 हजार रोगियों ने पंजीयन कराया है। सभी जिला चिकित्सालयों में कीमोथेरेपी के लिये आवश्यक 19 प्रकार की दवाइयाँ उपलब्ध है। निःशुल्क डॉयलिसिस सुविधा भी सभी 51 जिलों में उपलब्ध है। प्रदेश में 160 डॉयलिसिस मशीन स्थापित और लगभग 18 हजार रोगी पंजीकृत हैं। किडनी मरीजों के लिये इस वर्ष अब तक करीब 60 हजार डॉयलिसिस सत्र किये जा चुके हैं। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में ट्रॉमा यूनिट की स्थापना की जा रही है। 36 जिलों में अगले वर्ष से ट्रॉमा यूनिट क्रियाशील हो जाएगी। निःशुल्क सिटी स्केन सुविधा भी वर्ष 2018-19 में प्रदेश के 19 जिला चिकित्सालयों में शुरू हो रही है। मुख्यमंत्री की मंशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भस्थ शिशु, गर्भवती माता, किशोरी-किशोर, वृद्ध और आमजनों को बड़े से बड़े रोग में भी आसान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। इनके दूरगामी परिणाम दिखने भी लगे हैं। वह दिन दूर नहीं जब मुख्यमंत्री का विकसित ओर स्वस्थ मध्यप्रदेश का सपना पूरा होगा। |
Sunday, March 4, 2018
परिजनों की तरह नागरिकों की स्वास्थ्य चिंता करते हैं मुख्यमंत्री - रुस्तम सिंह
शिवराज सिंह चौहान तोड़ने नहीं जोड़ने का कार्य करते हैं
| शिवराज सिंह चौहान तोड़ने नहीं जोड़ने का कार्य करते हैं |
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| अनुपपुर | 04-मार्च-2018 |
शिवराज सिंह चौहान तोड़ने नहीं जोड़ने, बिगाड़ने नहीं बनाने में पारंगत हैं। यही उनकी खूबी है, विशिष्टता है। शिवराज जी से मैं सन 1981-82 से जुड़ा हूँ, जब मैं हमीदिया कॉलेज में फर्स्ट इयर में पढ़ता था। मैं विद्यार्थी परिषद से जुड़ा था, लेकिन कॉलेज चुनाव में यूथ पावर पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन करते थे। इस दौरान ही शिवराज जी श्री तपन भौमिक के साथ कॉलेज आये और हमें छात्र राजनीति की बारीकियों को बताया। तब से मैं उनसे लगातार सम्पर्क में रहा।
शिवराज जी की विशेषता है कि वे कभी कोई बात थोपते नहीं। सबकी सुनते हैं, राय लेते हैं और सर्वजन हिताय निर्णय लेते हैं। किसी भी बात पर उनसे चर्चा करो तो वे मुख्यमंत्री की तरह नहीं बड़े भाई की तरह पूरी आत्मीयता से मार्गदर्शन करते हैं। यह उनकी सहजता, सरलता और आत्मीयता ही है कि एक बार जो उनसे मिलता है, उनका मुरीद हो जाता है। उन्होंने बच्चों से मामा का रिश्ता महज नाम के लिए नहीं उसे निभाने के लिए बनाया है। शिवराज जी ने मुख्यमंत्री निवास में विभिन्न वर्गों की पंचायत बुलाई। उनके कल्याण की योजनाओं की चर्चा की। चर्चा में निकले निष्कर्षों के आधार पर योजनाएँ बनायीं। परिणामस्वरूप उनकी सभी योजनाएँ न केवल प्रदेश में सफल हुईं बल्कि उनकी ख्याति देश और विदेशों में भी हुई। जब लगता है कि हम बहुत काम करते हैं, थक जाते हैं तब एक बार उनसे मिल लेते हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है। उनके द्वारा रोज किये जा रहे कार्यों की जब जानकारी मिलती है तो लगता है कि हम तो बहुत कम काम कर रहे हैं। इस तरह से उनसे हमेशा और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। उनसे मिलने के बाद काम करने का जोश बढ़ जाता है। |
गाँव वालों की आय बढ़ाने के प्रयासों से गाँवों में आई है खुशहाली
| गाँव वालों की आय बढ़ाने के प्रयासों से गाँवों में आई है खुशहाली |
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| अनुपपुर | 04-मार्च-2018 |
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का कार्यकाल मध्यप्रदेश की प्रगति में टर्निंग प्वांइट सिद्ध हुआ है। उनके संकल्प धरातल पर दिखने लगे है। बेटियों को बोझ समझने की सदियों पुरानी मानसिकता से समाज को मुक्त कराने के उनके कार्य की जितनी भी प्रशंसा की जाये, कम है। महिलाओं का सशक्तिकरण होने से ग्रामीण महिलाएँ स्व-सहायता समूह, आजीविका परियोजना, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना आदि से जुड़कर परिवार की सामाजिक-आर्थिक उन्नति का कारण बन रही हैं। बेटियों के जन्म संबंधी सोच में आये अद्भुत बदलाव का लाभ देश और प्रदेश को भी मिल रहा है। प्रदेश प्रगति की ओर अधिक गति से अग्रसर हो रहा है। प्रदेश की पर केपिटा आय बढ़ी है। मुख्यमंत्री ग्रामीणों की आय बढ़ाने के जो प्रयास कर रहे हैं उनमें मछली-पालन और पशुपालन विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है। इससे किसान परिवारों को आय का अतिरिक्त जरिया मिला है। मत्स्य पालकों को उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण देने से प्रदेश में इस वर्ष एक लाख 38 हजार टन मत्स्योत्पादन हुआ, जो गत वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। मत्स्य-पालकों को 0 प्रतिशत ब्याज दर पर आर्थिक सहायता दिलाने के लिये 58 हजार मछुआ क्रेडिट कार्ड बनवाये जा चुके हैं। सुव्यवस्थित मत्स्य-विक्रय के लिय 8 थोक और 187 फुटकर मछली बाजार स्थापित किये गये हैं।
सदियों से किसान और पशुधन का साथ रहा है। मुख्यमंत्री आज इसी पशुधन की सहायता से किसानों की आय को दोगुना करने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016-17 से आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना शुरू करवाई है। इसमें पालक को 10 लाख रुपये तक की राशि डेयरी इकाई के लिये दी जाती है। वर्ष 2017-18 में 1350 हितग्राहियों को 18 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सहायता दी गई। प्रदेश में वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन 12.14 मिलियन था, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 13.45 मिलियन टन हो गया। आज दूध उत्पादन में प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है और किसानों को आय का एक मजबूत अतिरिक्त जरिया हासिल है। किसानों के पशु स्वस्थ रहें और भरपूर उत्पादन दें, इसके लिये पिछले साल से गोकुल महोत्सव शुरू किया गया है। गत वर्ष 28 अक्टूबर से 30 नवम्बर 2017 तक हुए गोकुल महोत्सव में प्रदेश के 50 हजार 700 गाँवों के 24 लाख 45 हजार पशुपालकों के एक करोड़ 62 लाख 26 हजार पशुओं को उन्हीं के गांव-घर में चिकित्सा सुविधाएँ दी गईं। बकरी पालन के लिये 1875 हितग्राहियों को 448 लाख का अनुदान भी दिया गया। दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरी कार्यक्रम का लाभ दिलाने के लिये प्रदेश के लगभग 27 हजार दुग्ध उपलब्धता वाले गाँव का सर्वेक्षण करवाया गया। आज इनमें 3034 दुग्ध संकलन केन्द्र चल रहे हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन डेढ़ हजार किलोग्राम से अधिक दूध संकलन किया जा रहा है। प्रदेश में 6700 दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री की मंशा को देखते हुए अक्टूबर 2017 तक 348 नई समितियों का गठन किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिये दूध क्रय रेट 600 रुपये प्रति किलो फेट की दर से बढ़ाकर 620 रुपये किया गया। वर्ष 2017-18 में अक्टूबर तक दुग्ध उत्पादकों को 791 करोड़ का भुगतान किया गया, जो गत वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है। इससे लगभग एक लाख 77 हजार दुग्ध उत्पादक लाभान्वित हुए हैं। पशु आहार सुदाना की विक्रय दरों में भी 50 पैसे प्रति किलो की कमी की गई। इससे दुग्ध उत्पादकों को उत्पादन लागत में राहत मिली। प्रदेश में डेयरी, कुक्कुट, बकरी, शूकर, कड़कनाथ आदि से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये भी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। पशुपालन विभाग कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों और महिलाओं को इनका अधिकाधिक लाभ दिलाने के लिये काम कर रहा है। यह मुख्यमंत्री की सोच और मध्य्रपदेश की उन्नति के लिये जुनून का ही कमाल है कि आज आदिवासी क्षेत्रों और गाँवों में सोच बदली है। महिलाएँ झिझक छोड़कर घर- परिवार संभालने के साथ आर्थिक दशा भी मजबूत कर रही हैं। महिलाएँ बैंक सखी, रेडीमेड गारमेंट, पशु-मछली पालन, सिलाई, उद्यानिकी आदि के प्रति अग्रसर हुई हैं। सरकारी योजनाओं के प्रति उपजी जागरूकता का परिणाम उनके बच्चों की अच्छी परवरिश के रूप में सामने आ रहा है। ये बच्चे आगे चलकर देश और प्रदेश का उज्जवल भविष्य बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समाज के हर वर्ग की चिन्ता की है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों को प्रदेश की ओर आकर्षित कर और नयी रोजगार योजनाएँ आरंभ कर युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर मुहैया करवाये हैं। प्रतिवर्ष होने वाले सूर्य नमस्कार से विद्यार्थियों में बाल्यावस्था से ही मानसिक और शारीरिक फिटनेस के लिये संस्कार आ रहा है। |
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