Monday, June 25, 2018

प्रदेश के 54 लाख विद्यार्थियो की मूलभूत दक्षताओं का आकलन

प्रदेश के 54 लाख विद्यार्थियो की मूलभूत दक्षताओं का आकलन 
दूरदर्शन से प्रसारित हो रहा विशेष कार्यक्रम 
अनुपपुर | 25-जून-2018

 
   राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लगभग 54 लाख विद्यार्थियों की वर्तमान दक्षताओं के आकलन के लिए बेसलाइन टेस्ट का कार्य 25 जून से प्रारंभ किया जा रहा है। इस टेस्ट में प्रदेश की लगभग 1 लाख 11 हजार से अधिक शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में कक्षा 3 से 8 में अध्यनरत विद्यार्थी शामिल होंगे।
   शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित दक्षता उन्नयन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे। इस आकलन में विद्यार्थियों की गणित एवं हिन्दी विषयक दक्षताओं का आकलन किया जायेगा। 25 से 30 जून, 2018 की अवधि में संपादित होने वाले इस टेस्ट को शाला स्तर पर किया जायेगा। जो विद्यार्थी इस दौरान शाला में अनुपस्थित रहेंगे उनके लिए 30 जून के बाद भी बेसलाइन टेस्ट आयोजित किया जाएगा। सभी नामांकित बच्चों की दक्षताओं का सटीक आकलन करने के उपरांत शैक्षिक सुधार हेतु निराकरणीय कार्ययोजना तैयार कर बच्चों के सीखने के स्तर अनुरूप समूह तैयार किये जायेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारी, जिला प्रशासन, शाला प्रबंधन समिति एवं पालक भी इस टेस्ट के सुचारू संचालन एवं मॉनिटरिंग में सक्रिय सहभागिता करेंगे। पूरे प्रदेश में निश्चित समयावधि में आयोजित किये जा रहे इस आकलन टेस्ट के संबंध में दूरदर्शन मध्यप्रदेश से सोमवार 25 जून को शाम 6 से 6.30 बजे तक एक कार्यक्रम भी प्रसारित किया जायेगा।
    यह बेसलाइन टेस्ट 25 से 30 जून की अवधि में विद्यालय स्तर पर ही कक्षा शिक्षक और विषय शिक्षक द्वारा किया जायेगा। जिसमें हिन्दी विषय में पढ़ना, पढ़कर-समझना तथा लिखना गणित विषय में अंक पहचान, संख्या पहचान, घटाव, गुणा, भाग और मापन, ज्यामिति आकृतियां के बिंदुओं पर बच्चों की वर्तमान दक्षताओं का आकलन किया जायेगा।
   विद्यार्थियों की वर्तमान दक्षताओं के सटीक आकलन के लिये इस टेस्ट के दौरान कक्षा/विषय शिक्षक द्वारा एक-एक विद्यार्थी को अपने पास बुलाकर टेस्ट संचालित किया जायेगा। लिखकर हल करने वालो प्रश्नों को बच्चों को अपनी कापी के पेज पर या कागज उपलब्ध कराकर हल कराया जाएगा। आकलन पश्चात् प्रत्येक बच्चे के पेज को उसके पोर्टफोलियों में रिकार्ड के रूप में सुरक्षित रूप से संधारित भी किया जाएगा।
   प्रश्नावली का प्रयोग किस तरह होना है और बेसलाइन टेस्ट को सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। बेसलाइन टेस्ट के लिये शाला मित्रों को आवंटित शालाओं का विवरण ईमेल पर गूगल शीट के माध्यम से जिलों को भेजा जा रहा है। प्रश्नावली उपयोग कैसे होना है उसकी विडियो की लिंक सभी शिक्षकों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजी गयी है। बेसलाइन टेस्ट के लिये जारी किये गए पत्र के ऊपर कोने में क्यूआर कोड को अंकित किया गया है, किसी भी एंड्राइड मोबाइल से इसे स्कैन करने पर विडियो की यू-ट्यूब लिंक खुल जाती है और उपकरणों (प्रश्न पत्रों) के इस्तमाल संबंधी विडियो प्रारंभ हो जाते है।
   बेसलाइन टेस्ट का जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्यो एवं अकादमिक सदस्यों के साथ ही राज्य स्तर से संबंधित जिला प्रभारी अधिकारियों द्वारा प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जायेगी।

समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये मध्यप्रदेश पुरस्कृत

समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये मध्यप्रदेश पुरस्कृत 
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री सिंह ने नई दिल्ली में दिया पुरस्कार 
अनुपपुर | 25-जून-2018
 
   मध्यप्रदेश को समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये शनिवार को नई दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ राज्य के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने यह पुरस्कार इंडिया टुडे पत्रिका के एग्रो समिट एण्ड अवार्ड-2018 समारोह में प्रदान किया। किसान-कल्याण एवं कृषि विभाग के संचालक श्री मोहनलाल ने प्राप्त किया। समग्र कृषि पैदावार में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर, उड़ीसा दूसरे, तेलंगाना तीसरे, आंध्रप्रदेश चौथे और महाराष्ट्र पाँचवें स्थान पर रहा है।
   इण्डिया टुडे एग्रो अवार्ड के लिये मध्यप्रदेश को कई कसौटियों पर कसा गया। देश के कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न राज्यों की कृषि सांख्यिकी का अध्ययन किया। इसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि मध्यप्रदेश ने वर्ष 2015-16 में गेहूँ की पैदावार बढ़ाने में खास उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में गेहूँ की उत्पादकता 176.80 लाख टन रही है। प्रति हेक्टेयर गेहूँ की उत्पादकता 2,993 किलोग्राम तक पहुँच गई है।
   अवार्ड कार्यक्रम में बताया गया कि मध्यप्रदेश देश का वह राज्य है, जिसने खेती में अपना जबरदस्त प्रदर्शन बरकरार रखा है। राज्य सरकार के कृषि पैदावार के आँकड़े बताते हैं कि खराब दौर में भी मध्यप्रदेश ने कृषि विकास में दोहरे अंकों की वृद्धि दर कायम रखी। समारोह में बताया गया कि केन्द्र सरकार के कृषि और किसान विकास मंत्रालय की ओर से कृषि विकास के लिये दिया जाने वाला कृषि कर्मण अवार्ड पिछले 5 साल से मध्यप्रदेश को मिल रहा है।
   समारोह में बताया गया कि कृषि के समग्र विकास के लिये यह जरूरी है कि खेती से जुड़े तमाम पहलुओं पर एक साथ काम किया जाये। मध्यप्रदेश ने पिछले एक दशक में यही किया है। मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की सतत कोशिश की गई है। प्रदेश में 700 छोटी सिंचाई परियोजनाओं को वर्ष 2018 के अंत तक पूरा करने का कार्यक्रम बनाया गया है। कृषि केबिनेट जैसी व्यवस्था ने भी मध्यप्रदेश को कृषि में अव्वल बनाये रखा है।

उद्यानिकी फसलों के माध्यम से प्रदेश के किसानों का विकास

उद्यानिकी फसलों के माध्यम से प्रदेश के किसानों का विकास 
 
अनुपपुर | 25-जून-2018
 
   प्रदेश को उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रयास कर रही है। विगत 13 वर्षों में उद्यानिकी फसलों जैसे फल-फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय पौधों इत्यादि के माध्यम से उद्यानिकी के रकबे में लगभग 3 गुना वृद्धि हुई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषकों को उच्च तकनीक की खेती करने के लिये अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
   शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले को उद्यानिकी के क्षेत्र में विकसित करने के लिये उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा कृषकों को जागरूक किया गया है। विकासखण्ड कोतमा के ग्राम रेउसा के कृषक श्री धरमदास पिता रामखेलावन के पास कुल एक हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से आधी जमीन पर कृषक द्वारा मिर्च फसल की खेती की गई, जिसमें ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति तथा वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया गया। कृषक के अनुसार वह काफी लम्बे समय से मिर्च की खेती करता आ रहा है परंतु पहले केवल लागत के अलावा बहुत कम मुनाफा होता था परंतु उद्यान विभाग के अधिकारियों के सम्पर्क में आने के बाद उसने उन्नत प्रकार के बीज का उपयोग किया तथा ड्रिप सिंचाई एवं वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से प्रति एकड़ लगभग 1.37 लाख रुपये की आय होने लगी है, जो पहले से लगभग दोगुनी है। इससे प्रोत्साहित होकर कृषक उद्यानिकी के रकबे में वृद्धि करने की तैयारी कर रहा है। इसी प्रकार विकासखण्ड कोतमा के ग्राम बसखला के कृषक समयलाल पिता पूरन, जो पूर्व वर्षों में उद्यानिकी की खेती परम्परागत तरीके से करता था, उद्यान विभाग में अधिकारियों के सम्पर्क में आने के बाद विभाग में पंजीयन करवाया, जिससे उसे ड्रिप एवं मल्चिंग योजना का लाभ लेकर आधुनिक पद्धति से खेती करना शुरू किया तथा टमाटर के हाइब्रिड बीज एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग कर 0.100 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की, जिससे उसे लगभग 3 टन का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे कृषक ने स्थानीय बाजार में बेचकर 60 हजार रुपये का मुनाफा कमाया है।
   इस प्रकार राज्य सरकार की मंशानुसार उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग के सतत प्रयास एवं कृषकों से जीवंत सम्पर्क बनाकर विभागीय योजनाओं के माध्यम से कृषकों की आय दोगुनी करने की दिशा में सराहनीय कार्य किया गया है।

Featured Post

युवा एवं महिला मतदाताओ की सहभागिता बढ़ाने हेतु किए जाएँगे प्रयास

युवा एवं महिला मतदाताओ की सहभागिता बढ़ाने हेतु किए जाएँगे प्रयास नोडल अधिकारियों की बैठक में निर्वाचन दायित्वों की कलेक्टर ने की समीक्षा    ...

इस सप्ताह सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें