| ग्राम पंचायतों ने ऑनलाइन भुगतान किये 9970 करोड़ |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने बताया है कि प्रदेश की ग्राम पचायतों में भी कैशलेस व्यवस्था लागू कर दी गई है। ग्राम पंचायतों द्वारा सभी प्रकार का भुगतान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। श्री भार्गव ने बताया कि अब तक 22 हजार 816 ग्राम पंचायतों द्वारा विभिन्न मदों में पोर्टल के माध्यम से 9 हजार 970 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है।
श्री भार्गव ने बताया कि मध्यप्रदेश में ई-पंचायत की अवधारणा काफी समय पहले से लागू है। पंचायतों में लेखा कार्य में शुद्धता और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए ऑनलाइन वेब-पोर्टल पंचायत दर्पण एन.आई.सी के माध्यम से संचालित है। इससे काम में गति आई है और वेंडर्स को समय पर भुगतान मिल रहा है। |
Thursday, May 24, 2018
ग्राम पंचायतों ने ऑनलाइन भुगतान किये 9970 करोड़
सभी शासकीय जिला अस्पतालों मे उपलब्ध है डायलिसिस की सुविधा
| सभी शासकीय जिला अस्पतालों मे उपलब्ध है डायलिसिस की सुविधा |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
प्रदेश के सभी शासकीय जिला चिकित्सालयों में किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों को मासिक उपचार से मुक्ति दिलाने के लिये आउटसोर्स के माध्यम से डायलिसिस सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। देश में मध्यप्रदेश सभी जिलों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने वाला पहला राज्य है।
डायलिसिस की सुविधा गरीब परिवार के मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। अन्य श्रेणी के मरीजों के लिये प्रति हीमोडायलिसिस सत्र 500 रूपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। वर्ष 2017-18 में डायलिसिस इकाईयों के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित 1750 मरीजों को 53 हजार 566 हीमोडायलिसिस सत्रों के माध्यम से इस सुविधा का लाभ दिया गया। प्रदेश में किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि परिलक्षित होने के कारण यह व्यवस्था की गई है। जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा मुहैया करवाई गई है। किडनी की बीमारी का समुचित उपचार बहुत जटिल होता है। पूर्व में प्रदेश के कुछ बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में ही इसका उपचार उपलब्ध हो रहा था। मरीज को सामान्यत: सप्ताह में दो-तीन बार हीमोडायलिसिस करवाना पड़ता है। यह सुविधा मात्र कुछ शहरों तक सीमित होने के कारण मरीजों को उपचार के लिये अपने निवास स्थान से बड़े शहरों में बार-बार जाना पड़ता था। हीमोडायलिसिस के उपचार पर प्रति सत्र 1500 से 2000 रूपये तक का खर्च होता था। इसके अलावा मरीज को आने-जाने में और खर्च भी होते थे। इस तरह डायलिसिस के मरीज को माह में कम से कम 20 से 25 हजार रूपये तक खर्च करना पड़ता था। अब सभी चिकित्सालयों में यह सुविधा न्यूनतम खर्च में उपलब्ध हो जाने से किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों को राहत मिली है। |
मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये हो रहे हैं नवाचार
| मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये हो रहे हैं नवाचार |
| उपभोक्ताओं और उद्योगों के हित में भी हुए अनेक कार्य |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
मध्यप्रदेश में अनेक नवाचारों के जरिये बिजली उपभोक्ताओं को विभिन्न सेवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उपभोक्ताओं को नये बिजली कनेक्शन के आवेदन ऑनलाइन जमा करने की सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री स्थायी कृषि पम्प योजना में भी ऑनलाइन आवेदन लेने के अलावा किसानों को ठेकेदार के चयन की सुविधा मुहैया करवाई गई है।
मीटर-रीडिंग की व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में नवाचार अपनाया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा फोटो मीटर-रीडिंग की शुरूआत की गई है। इसमें मीटर-रीडिंग का फोटो देयक में दिखता है। इसी कम्पनी ने मोबाइल एप उर्जस को प्रारंभ किया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा ऑनलाइन केन्द्रीकृत कॉल-सेंटर सम्पर्क शुरू किया है। सम्पर्क के द्वारा उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण तुरंत किया जा रहा है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा यूपे (UPAY) मोबाइल एप की सुविधा प्रारंभ की जा चुकी है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा उपभोक्ताओं की सेवाओं के लिये स्मार्ट बिजली मोबाइल एप विकसित किया गया है।
उपभोक्ताओं के हित में हुए अनेक कार्य
नवाचारों को लागू करवाने के अलावा बिजली उपभोक्ताओं के हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। किसानों एवं निम्न आय वर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं को कम दर पर विद्युत प्रदाय हो रहा है। किसानों को फ्लेट रेट 1400 रुपये प्रति हार्स-पॉवर प्रति वर्ष की दर पर बिजली दी जा रही है। यह दर टैरिफ दर का मात्र पाँचवा हिस्सा है। एक हेक्टेयर तक भूमि वाले अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 5 हार्स-पॉवर क्षमता तक के पम्पों पर नि:शुल्क विद्युत प्रदाय की सुविधा दी गई है। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले उपभोक्ताओं को 25 यूनिट विद्युत का उपयोग करने पर कोई प्रभार नहीं देना होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को 30 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने पर प्रति यूनिट एक रुपये 10 पैसे की सब्सिडी मिल रही है।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये छूट
कैप्टिव पॉवर उपयोगकर्ता को कैप्टिव उत्पादन कम कर, वितरण कम्पनी से बिजली क्रय करने पर बढ़ी हुई खपत पर 2 रुपये प्रति यूनिट की छूट 5 वर्ष तक के लिये दी गई है। उच्च-दाब उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई यूनिट पर ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट प्राप्त है। नये उच्च-दाब कनेक्शनों को ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत अथवा एक रुपये प्रति यूनिट में से जो भी कम हो, की 5 वर्ष के लिये छूट है। उच्च-दाब कनेक्शन लेने वाले नये उद्योगों के लिये 33 के.वी. पर 5 वर्ष, 132 के.वी. पर 7 वर्ष तथा 220 के.वी. पर 10 वर्ष के लिये विद्युत शुल्क से छूट की सुविधा है। विद्युत शुल्क के युक्ति-युक्तकरण के फलस्वरूप खदानों, सीमेंट उद्योग और स्टोन क्रेशर को छोड़कर सभी अन्य उद्योगों पर 15 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत की दर से विद्युत शुल्क लिया जा रहा है। |
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