Friday, May 18, 2018

विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को दिए 12 हजार 699 करोड़ रुपये

विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को दिए 12 हजार 699 करोड़ रुपये 
 
अनुपपुर | 18-मई-2018
 
   पंचायत औ ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि पंच-परमेश्वर योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों को न्यूनतम राशि प्रदान करने की गारंटी देने वाला मध्यप्रदेश पहला प्रदेश है। योजना के जरिये ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना विकास के लिए 12 हजार 699 करोड़ रुपये की राशि सभी 22 हजार 816 ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करवाई जा चुकी है।
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर वर्ष 2012 से प्रदेश में पंच-परमेश्वर योजना प्रारंभ की गई है। इसमें 13वाँ-14वाँ वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, स्टाम्प ड्यूटी, अनुरक्षण गौण-खनिज, पंचायत भवन निर्माण राशि को एकजाई कर, साल में 2 बार राशि उपलब्ध करवाई जाती है। यह राशि कम से कम 5 लाख रुपये होती है। ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करवाई गई राशि से अन्य कार्यों के साथ 18 हजार किलोमीटर सी.सी. रोड का निर्माण करवाया गया है।
   पंच-परमेश्वर योजना में वर्ष 2011-12 में एक हजार 402 करोड़ रुपये, वर्ष 2012-13 में एक हजार 407 करोड़, वर्ष 2013-14 में एक हजार 500 करोड़, वर्ष 2014-15 में 800 करोड़, वर्ष 2015-16 में एक हजार 646 करोड़, वर्ष 2016-17 में तीन हजार 601 करोड़ अौर वर्ष 2017-18 में 2 हजार 341 करोड़ की राशि विकास गतिविधियों के लिए उपलब्ध करवाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में संशोधित आदेश जारी

मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में संशोधित आदेश जारी 
 
अनुपपुर | 18-मई-2018
 
    मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में मंत्री परिषद व्दारा पुनरू संशोधन कर संशोधित आदेश जारी कर दिए है जिसके फलस्वरूप अब मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग व्दारा भी संचालित की जाएगी। अब मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना अंतर्गत आयु सीमा के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि आवेदक का परिवार पहले से ही उद्योग, व्यापार के क्षेत्र में स्थापित न हो, तथा केवल आवेदक आयकरदाता न हो।

अब भूमि-स्वामी निश्चिंत होकर दे सकेगा बटाई पर कृषि भूमि

अब भूमि-स्वामी निश्चिंत होकर दे सकेगा बटाई पर कृषि भूमि 
राष्ट्रपति ने दी मध्यप्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण अधिनियम को मंजूरी 
अनुपपुर | 18-मई-2018
 
   प्रदेश सरकार द्वारा कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा बटाईदार एवं भूमि-स्वामी के अधिकारों एवं हितों के संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण अधिनियम-2016 बनाया गया है। अधिनियम पर राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद 9 मई 2018 से यह पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो गया है।
   इस अधिनियम के लागू होने से भूमि-स्वामी निश्चिंत होकर जमीन बटाई पर दे सकेगा। इससे जमीन पड़त में नहीं पड़ी रहेगी। कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग हो सकेगा। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। प्राकृतिक आपदा आने पर राहत भी मिल सकेगी।
अनुबंध अधिकतम 5 वर्ष के लिए
   भू-स्वामी एवं बटाईदार के मध्य अनुबंध निर्धारित प्रारूप में सादे कागज पर तीन प्रति में होगा। एक-एक प्रति दोनों पक्षकारों को औ एक प्रति तहसीलदार को दी जायेगी। अनुबंध अधिकतम 5 वर्ष के लिए होगा। पक्षकार अनुबंध का नवीनीकरण कर सकेंगे। आदिम जनजाति वर्ग का भूमि-स्वामी अधिसूचित क्षेत्र में स्थित अपनी कृषि भूमि केवल अधिसूचित क्षेत्र के आदिम जनजाति के सदस्य को ही बटाई पर दे सकेगा। बटाईदार को कृषि कार्य, सुधार औ कृषि से संबंधित कार्य करने का अधिकार होगा। अनुबंध की अवधि समाप्त होते ही भूमि पर स्वमेव भूमि-स्वामी का कब्जा हो जायेगा। इसमें किसी आदेश की जरूरत नहीं होगी।
प्राकृतिक आपदा में दोनों पक्षकार को मिलेगी सहायता
   प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी कारण से फसल हानि पर मिलने वाली सहायता तथा बीमा कंपनी से मिलने वाली दावा राशि अनुबंध के आधार पर भूमि-स्वामी औ बटाईदार के बीच बँटेगी। बटाईदार की मृत्यु पर अनुबंध में उल्लेखित अधिकार उसके विधिक उत्तराधिकारी को मिलेंगे।
60 दिवस में होगा विवाद का निराकरण
   विवाद की स्थिति में तहसीलदार जाँच कर मामले का निराकरण करेगा। मामले का निराकरण 60 दिवस में करना होगा। विलंब पर 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5 हजार रुपये तक का अर्थदण्ड लगाने का प्रावधान है।
अनुबंध तोड़ने पर लगेगा जुर्माना
   तहसीलदार अनुबंध तोड़ने वाले पर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना लगा सकेगा। बटाईदार द्वारा अनुबंध की समाप्ति के बाद कब्जा नहीं छोड़ने पर उसे 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर जुर्माने के साथ ही तीन माह तक की जेल से भी दण्डित किया जा सकेगा।

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