Saturday, June 23, 2018

रबी सीजन में भी होगा सूखा घोषित

रबी सीजन में भी होगा सूखा घोषित 
सूखा की स्थिति से निपटने के लिये स्थायी राहत निर्देश 
अनुपपुर | 23-जून-2018
 
   राज्य शान द्वारा सूखा घोषणा एवं प्रबंधन के लिये पूर्व के निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए नये निर्देश जारी किये गये हैं। अब रबी सीजन में भी सूखा घोषित करने का प्रावधान किया गया है। पहले सिर्फ खरीफ सीजन में ही सूखा घोषित करने का प्रावधान था। खरीफ में अगस्त तथा रबी में दिसंबर तक अग्रिम सूखा घोषित किया जा सकेगा।
90 दिन तक पेयजल परिवहन के अधिकार कलेक्टर को
   राजस्व,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने जानकारी दी है कि सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखा में 90 दिन पेयजल परिवहन के अधिकार कलेक्टर को दिये गये हैं। 90 दिन से अधिक के लिये राज्य शासन की अनुमति लेनी होगी। पहले सभी अनुमतियाँ राज्य शासन द्वारा जारी की जाती थीं। अब सूखा राहत मद से पेयजल स्त्रोतों की मरम्मत भी करायी जा सकेगी।
सूखा के लिये वैज्ञानिक मापदण्ड
   सूखा की घोषणा वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर भारत सरकार के सूखा प्रबंधन मैनुएल-2016 के आधार पर की जायेगी। पहले चरण में वर्षा के आंकड़ो का परीक्षण होगा। फिर बोनी के क्षेत्र, जल विज्ञान संबंधी सूचकांकों, सुदूर संवेदन के सूचकांकों और मृदा नमी के सूचकांको को जांचा जायेगा। तीसरे चरण में मौका सत्यापन करवाया जायेगा।। जिसमें पहले और दूसरे चरण के निष्कर्षो की पुष्टि की जायेगी। मौका सत्यापन में अगर 33 प्रतिशत या अधिक की क्षति पायी जाती है, तो मध्यम सूखा और 50 प्रतिशत से अधिक की फसल क्षति पर क्षेत्र गंभीर सूखा की पात्रता में आयेगा।
   सूखा क्षेत्र की भौगोलिक एवं प्रशासकीय इकाई ग्राम पंचायत, तहसील अथवा जिला हो सकती है। सूखा की अधिसूचना अधिकतम 6 माह तक प्रभावी रहेगी। खरीफ के सूखे की अधिसूचना अधिकतम 30 अक्टूबर और रबी के सूखे की अधिसूचना अधिकतम 31 मार्च तक जारी की जायेगी।
   महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) में 100 कार्य दिवस का रोजगार प्रत्येक जाबकार्ड धारक परिवार को उपलब्ध कराया जाता है। सूखे की स्थिति में 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है। राहत कार्यों में अधिकांश कार्य जल संरक्षण के करवायें जायेंगे।

चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम के प्रवेश में संशोधन प्रक्रिया 25 जून तक

चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम के प्रवेश में संशोधन प्रक्रिया 25 जून तक 

अनुपपुर | 23-जून-2018
 
   चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा नीट यूजी-2018 की मेरिट के आधार पर शासकीय तथा निजी चिकित्सा और दंत चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। इसमें स्टेट कोटे के तहत एम.बी.बी.एस./बी.डी.एस. के स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिये राज्य-स्तरीय संयुक्त काउंसलिंग यूजी-2018 द्वारा ऑनलाइन प्रवेश दिया जा रहा है।
   ऐसे पंजीकृत अभ्यर्थी, जो पूर्व में किये गये पंजीकरण की प्रविष्टि में संशोधन चाहते हैं, उन्हें एक अवसर और दिया जा रहा है। पंजीयन में संशोधन की सुविधा आगामी 25 जून की मध्य रात्रि 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी। अभ्यर्थियों को स्पष्ट किया गया है कि संशोधन के बाद यदि वे प्रविष्टियों को सुरक्षित (Save) नहीं करते है, तो उनका रजिस्ट्रेशन अपडेट नहीं होगा। ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों द्वारा पूर्व में किये गये रजिस्ट्रेशन की प्रविष्टियों को अंतिम माना जायेगा।
   काउंसिलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी वेबसाइट <www.medicaleducation.mp.gov.in> एवं निर्धारित पोर्टल <https://dme.mponline.gov.in> पर उपलब्ध है। संचालक, चिकित्सा शिक्षा ने बताया है कि अभ्यर्थी काउंसलिंग से संबंधित सूचना के लिये संचालनालय की वेबसाइट एवं एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के सम्पर्क में रहें।

उचित मूल्य की दुकानें होगी बहुउद्देश्यीय : मुख्यमंत्री श्री चौहान

उचित मूल्य की दुकानें होगी बहुउद्देश्यीय : मुख्यमंत्री श्री चौहान 
मुख्यमंत्री के समक्ष हुआ योजना का प्रस्तुतिकरण 
अनुपपुर | 23-जून-2018
 
   प्रदेश में उचित मूल्य दुकानों को बहुउद्देशीय दुकानों में परिवर्तित करने की योजना बनाई गयी है। प्रयोग के तौर पर प्रथम चरण में एक हजार उचित मूल्य दुकानों को बहुउद्देशीय दुकानों में परिवर्तित किया जायेगा। इन दुकानों में उपभोक्ताओं को एमआरपी से न्यूनतम पाँच प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस व्यवस्था के संचालन के लिये सहकारिता विभाग द्वारा साफ्टवेयर तैयार किया जायेगा। योजना का मंत्रालय में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि योजना को पायलट योजना के स्वरूप में क्रियान्वयन किया जाये। क्रियान्वयन स्वरूप परिणामों की जानकारी प्रस्तुत की जाये। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे।
   इस मौके पर बताया गया कि उचित मूल्य दुकानों से उपभोक्ताओं को कम दर पर गुणवत्तायुक्त वस्तुएं उपलब्ध होंगी। इससे उचित मूल्य दुकानों के खुले रहने की अवधि बढ़ेगी। उचित मूल्य दुकानों की उपयोगिता बढ़ेगी। प्रदेश में कुल 22 हजार 396 उचित मूल्य दुकानें हैं, जिनमें 18 हजार 96 दुकानें ग्रामीण क्षेत्र में हैं। योजना के क्रियान्वयन के लिये राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ नोडल एजेंसी रहेगा। नीतिगत निर्णयों के लिये आयुक्त सहकारिता की अध्यक्षता में एक सक्षम समिति गठित होगी।
   बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री पी.सी. मीणा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल, श्री विवेक अग्रवाल और श्री हरिरंजन राव, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री के.सी. गुप्ता, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती नीलम शमी राव, आयुक्त सहकारिता श्री केदार शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

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