Thursday, June 21, 2018

विवाह का बंधन एवं जिम्मेदारियों से ऊपर उठ समाजकार्य को लक्ष्मी ने बनाया भविष्य विद्यालय से हुई विदाई

सफलता की कहानी
विवाह का बंधन एवं जिम्मेदारियों से ऊपर उठ समाजकार्य को लक्ष्मी ने बनाया भविष्य 
विद्यालय से हुई विदाई



अनूपपुर 21 जून 2018/ वैयक्तिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ हर एक मनुष्य की एक सामाजिक ज़िम्मेदारी भी होती है। हर एक मनुष्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह समाज के सुधार एवं पिछड़ों के विकास के बारे मे सोचे। उनके उत्थान के लिए, उनकी सेवा के बारे मे सोचे एवं सदैव प्रयासरत रहे। लोगों मे जनसेवा की ऐसी ही भावना को मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के द्वारा विकसित किया जा रहा है।
जनसेवा के प्रति इस प्रकार के समर्पण एवं समाज के विकास की विधाओं से परिचित होकर, समाज मे सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु ग्राम बैहा टोला की लक्ष्मी ने अपने विवाह की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता न देकर समाजकार्य को चुना।  विकासखण्ड कोतमा अंतर्गत ग्राम बैहाटोला में निवास करने वाली छात्रा लक्ष्मी पनिका जो कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम अंतर्गत संचालित समाजकार्य स्नातक(सामुदायिक नेतृत्व) द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत है, का विवाह दिनांक 20 जून 2018 को हुआ और वार्षिक परीक्षा का पेपर 21 जून 2018 को था छात्रा के द्वारा शिक्षा को अहमियत देते हुए ससुराल पक्ष को अवगत कराकर विदाई के बाद परीक्षा केंद्र उत्कृष्ट विद्यालय कोतमा पहुंचकर परीक्षा दी। इसके उपरांत ससुराल के लिए प्रस्थान की। वास्तव में लक्ष्मी की विदाई घर से नहीं बल्कि विद्यालय परिवार के द्वारा हुई। लक्ष्मी के इस समर्पण को देख कर पुनः यह स्पष्ट हो गया नारियां किसी से भी पीछे नहीं हैं। ऐसी ही जागरूक महिलाओं के द्वारा नए देश का, विकसित समाज का रूप गढ़ा जाएगा। प्रभारी कलेक्टर एवं मुख्यकार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना एवं जन अभियान परिषद के ज़िला समन्वयक श्री उमेश पांडे ने लक्ष्मी को शुभकामनाए दी हैं। समाज के प्रति अगर सभी अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन मे लक्ष्मी जैसा समर्पण दिखाएँ तो निःसंदेह यह स्थान और भी सुंदर एवं मनमोहक हो जाएगा। जहां सभी लोगों के जीवन मे खुशहाली होगी। 

अनूपपुर ज़िले मे किया गया सामूहिक योगाभ्यास अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विविध जगहो मे आयोजित हुए योग कार्यक्रम

अनूपपुर ज़िले मे किया गया सामूहिक योगाभ्यास
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विविध जगहो मे आयोजित हुए योग कार्यक्रम
योग को दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने का लिया गया प्रण




अनूपपुर 21 जून 2018/ योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। शरीर को मन से , मन को आत्मा से और आत्मा को परमात्मा से जोड़कर दिव्य आनंद की प्राप्ति योग के नियमित अभ्यास से संभव है। योग के इसी महत्व को समस्त विश्व के सामने लाकर समस्त मानव जाति का उत्थान करना अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य है। मनुष्य के अंदर छुपे समस्त शारीरिक एवं मानसिक विकारो को दूर कर शांति एवं समरसता के वातावरण का निर्माण योग से संभव है। योग के इस महत्व को रेखांकित कर, योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का प्रण लेने के उद्देश्य से आज सम्पूर्ण ज़िले मे, विद्यालयों मे, आंगनवाड़ियों मे सामूहिक योगाभ्यास किया गया। 

शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय अनूपपुर मे ज़िला स्तरीय योगाभ्यास कार्यक्रम मे विधायक अनूपपुर श्री रामलाल रौतेल, प्रभारी कलेक्टर एवं मुख्यकार्यपालन अधिकारी डॉ सलोनी सिडाना, पुलिस अधीक्षक श्री सुनील कुमार जैन, अपर कलेक्टर डॉ आर पी तिवारी समेत विभिन्न विभागो के जिलाधिकारी, नवनियुक्त आरक्षक, छात्र एवं छात्राओ के साथ आम जन उपस्थित थे। पतंजलि योग पीठ से संबन्धित योगाचार्यों द्वारा समस्त उपस्थितों को योगाभ्यास कराया गया। योगाभ्यास के दौरान समस्त योगो के शारीरिक एवं मानसिक लाभों के बारे मे भी उपस्थितों को अवगत कराया गया।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के उद्बोधन को अनूपपुर मे सुना गया
कार्यक्रम मे प्रधानमंत्री जी के देहरादून से दिये गए उद्बोधन के श्रवण की व्यवस्था की गयी थी। सभी ने प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर योग को अपनाकर रोगों से मुक्ति पाने का निश्चय कर योगाभ्यास किया।

समस्याओं अलगावों से भरे विश्व मे योग सबसे सशक्त एकीकरण बल है - पीएम नरेंद्र मोदी देहरादून से समस्त विश्व के योग प्रेमियों को अंतराष्ट्रीय योग दिवस की दी बधाई

समस्याओं अलगावों से भरे विश्व मे 'योग' सबसे सशक्त एकीकरण बल है - पीएम नरेंद्र मोदी
देहरादून से समस्त विश्व के योग प्रेमियों को अंतराष्ट्रीय योग दिवस की दी बधाई



अनूपपुर 21 जून 2018/ आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देहरादून से समस्त विश्व को संबोधित किया। आपने देवभूमि उत्तराखंड की  पावन धरती से दुनियाभर के योग प्रेमियों को चौथे अंतराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा मां गंगा की इस भूमि पर, जहां चारधाम स्थित हैं, जहां आदि शंकराचार्य आए, जहां स्वामी विवेकानंद कई बार आए, वहां योग दिवस पर हम सभी का इस तरह एकत्रित होना, किसी सौभाग्य से कम नहीं। उत्तराखंड तो वैसे भी अनेक दशकों से योग का मुख्य केंद्र रहा है। यहां के ये पर्वत स्वत: ही योग और आयुर्वेद के लिए प्रेरित करते हैं। सामान्य से सामान्य नागरिक भी जब इस धरती पर आता है, तो उसे एक अलग तरह की, एक दिव्य अनुभूति होती है। इस पावन धरा में अद्भुत स्फूर्ति है, स्पंदन है, सम्मोहन है।ये हम सभी भारतीयों के लिए गौरव की बात है कि आज जहां-जहां उगते सूर्य के साथ जैस-जैसे सूरज अपनी यात्रा करेगा,  सूरज की किरण पहुंच रही है, प्रकाश का विस्तार हो रहा है, वहाँ - वहाँ लोग योग से सूर्य का स्वागत कर रहे हैं। देहरादून से लेकर डबलिन तक, शंघाई से लेकर शिकागो तक, जकार्ता से लेकर जोहानिसबर्ग तक, योग ही योग , योग ही योग है।हिमालय के हजारों फीट ऊंचे पर्वत हों या फिर धूप से तपता रेगिस्तान, योग हर परिस्थिति में, हर जीवन को समृद्ध कर रहा है।
जब तोड़ने वाली ताकतें हावी होती है तो बिखराव आता है।  व्‍यक्तियों के बीच समाज के बीच  देशों के बीच बिखराव आता है। समाज में दीवारें खड़ी होती है, परिवार में कलह बढ़ता है और यहाँ तक कि व्यक्ति अंदर से टूटता है और जीवन में तनाव बढ़ता जाता है। इस बिखराव के बीच योग जोड़ता है। जोड़ने का काम करता है आज की आपाधापी और तेज़ भागती ज़िंदगी में योग मन, शरीर और बुद्धि आत्‍मा को जोड़कर व्यक्ति के जीवन में शांति लाता है। व्यक्ति को परिवार से जोड़कर परिवार में ख़ुशहाली लाता है। परिवारों को समाज के प्रति संवेदनशील बना कर समाज में सद्भावना लाता है। समाज राष्ट्र की एकता के सूत्र बनते है। और ऐसे राष्ट्र विश्व में शांति और सौहार्द लाते है। मानवता, बंधुभाव से पल्लवित और पोषित होती है। यानी योग व्यक्ति-परिवार-समाज-देश-विश्व और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ता है।
जब यूनाइटेड नेशन्‍स में योग के लिए प्रस्‍ताव रखा और ये यूनाइटेड नेशन्‍स का रिकॉर्ड है, ये पहला ऐसा प्रस्‍ताव था जिसको दुनिया के सर्वाधिक देशों ने कॉस्‍पान्‍सर किया। ये पहला ऐसा प्रस्‍ताव था जो UN के इतिहास में सबसे कम समय में स्‍वीकृति हुआ और ये योग आज विश्‍व का हर नागरिक, विश्‍व का हर देश योग को अपना मानने लगा है और अब हिन्‍दुस्‍तान के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि हम उस महान विरासत के धनी है, हम उन महान परम्‍परा की विरासत को संजोय हुए है।
अगर हम अपनी विरासत पर गर्व करना शुरू करें जो कालबाह्यी है उसे छोड़ दें और वो टिकता भी नहीं है। लेकिन जो समय के अनुकूल है, जो भविष्‍य के निर्माण में उपकारक है ऐसी हमारी महान विरासत को अगर हम गर्व करेंगे तो दुनिया गर्व करने में कभी भी हिचकिचाहट नहीं अनुभव करेगी। लेकिन अगर हमें, हमारी शक्ति, सामर्थ्‍य के प्रति भरोसा नहीं होगा, तो कोई स्‍वीकार नहीं करेगा। अगर परिवार में परिवार ही बच्‍चे को हमेशा नकारता रहे और अपेक्षा कि मोहल्‍ले वाले बच्‍चे को सम्‍मान करे, तो वह संभव नहीं है। जब मां, बाप, परिवार, भाई, बहन बच्‍चे को जैसा भी हो स्‍वीकार करते है तब जा करके मोहल्‍ले के लोग भी स्‍वीकार करना शुरू कर देते है।
आज योग ने सिद्ध कर दिया है कि जैसे हिन्‍दुस्‍तान ने फिर से एक बार योग के सामर्थ्‍य के साथ अपने साथ जोड़ दिया दुनिया अपने आप जुड़ने लग गई। योग आज दुनिया की सबसे सशक्त यूनीफाईंग फोर्स में से एक बन गया है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यदि आज पूरी दुनिया में योग करने वालों के आंकड़े जुटाए जाएं तो अद्भुत तथ्य विश्‍व के सामने आएंगे। अलग-अलग देशों में, पार्कों में, खुले मैदानों में, सड़कों के किनारे, दफ्तरों में, घरों में, अस्पतालों में, स्कूलों में, कॉलेजों में, ऐतिहासिक विरासतों के सानिध्य में, योग के लिए जुटते सामान्य लोग, आप जैसे लोग, विश्व बंधुत्व के भाव और  वैश्विक मित्रता को और ऊर्जा दे रहे हैं।
अनूपपुर मे सुना गया प्रधानमंत्री जी का उदबोधन
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस उद्बोधन को अनूपपुर मे सुना गया एवं सभी ने योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर स्वस्थ एवं शांतिमय जीवन जीने का प्रण लिया।

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