| नजूल पट्टे का बकाया शेष नहीं होने पर 30 वर्ष के लिए होगा नवीनीकरण |
| स्थायी पट्टों के लिये नई नीति निर्धारित : राजस्व मंत्री श्री गुप्ता |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
राज्य शासन ने नजूल के स्थायी पट्टों के नवीनीकरण की नयी नीति निर्धारित की है। नीति के माध्यम से स्थायी पट्टों की शर्तों के उल्लंघन/ अपालन के प्रकरणों का त्वरित निराकरण होने के साथ ही पट्टों का नवीनीकरण भी हो सकेगा। प्राधिकृत अधिकारी नवीनीकरण के पहले वार्षिक भू-भाटक निर्धारित करेगा। यह अंतिम निर्धारित भू-भाटक का 6 गुना होगा।
राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने जानकारी दी है कि स्थायी पट्टे के नवीनीकरण और शर्त उल्लंघन के शमन के लिए जिला कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत अपर कलेक्टर प्राधिकृत अधिकारी होंगे। स्थायी पट्टे की समाप्ति के एक वर्ष पहले की अवधि के दौरान कभी-भी नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जा सकेगा। अवधि समाप्ति के बाद विलम्ब से प्राप्त आवेदनों पर शमन राशि अधिरोपित की जायेगी। यह आदेश 31 मार्च 2017 के पहले जारी किये गए स्थायी पट्टों के संबंध में प्रभावशील होंगे। ऐसे मामले, जिनमें स्थायी पट्टों की अवधि 31 मार्च 2017 के पहले समाप्त हो चुकी है तथा पट्टे की शर्त के उल्लंघन की स्थिति निर्मित हो रही है, में इस परिपत्र के जारी होने के दिनांक 4 मई 2018 से एक वर्ष तक आवेदन किया जा सकेगा। प्राप्त आवेदनों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में किया जायेगा। प्राधिकृत अधिकारी पट्टे के नवीनीकरण के पहले नजूल अधिकारी/ तहसीलदार नजूल के माध्यम से निर्धारित बिन्दुओं पर रिपोर्ट लेगा। स्थायी पट्टों की किन्हीं शर्तों का उल्लंघन पाये जाने पर पट्टेदार को सुनवाई का अवसर देने के बाद प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रकरण का निराकरण किया जायेगा। आवासीय भू-खंड में पट्टेदार द्वारा आवासीय उपयोग के साथ संरचना के 25 प्रतिशत से कम भाग का उपयोग स्वयं अथवा परिवार के किसी सदस्य द्वारा ट्यूशन, सिलाई-कढ़ाई, पापड़-बड़ी जैसे कुटीर उद्योग के लिए किया जाता है, तो वह प्रयोजन परिवर्तन नहीं माना जायेगा। लेकिन कोचिंग क्लासेस, बुटीक अथवा ब्यूटी पार्लर के लिए उपयोग करने पर इसे वाणिज्यिक प्रयोजन माना जायेगा। गेस्ट हाउस अथवा हॉस्टल चलाने को भी वाणिज्यिक प्रयोजन माना जायेगा। पट्टेदार निर्धारित प्रक्रियानुसार व्यावसायिक प्रयोजन के लिए परिवर्तन करवा सकता है। मूल पट्टेदार की मृत्यु होने पर उत्तराधिकारी को पट्टे का अंतरण करवाना होगा। इसके बाद नवीनीकरण होगा। भू-खंड के दान अथवा विक्रय पर भी अंतरण की कार्यवाही होगी। ऐसे मामलों में जिनमें पट्टावधि अवसान के बाद नवीनीकरण कराए बिना ही भू-खण्ड का अंतरण किया गया है, अंतरिती द्वारा नवीनीकरण चाहे जाने पर इस कंड़िका के अन्य प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुए सर्वप्रथम मूल पट्टेदार के नाम कल्पित नवीनीकरण स्वीकार करते हुए, तद्क्रम में अंतरण के आधार पर अंतरिती के नाम से नवीनीकरण किया जाएगा। ऐसे मामलों में जिनमें पट्टावधि के अवसान होने के बाद तीस वर्ष या उससे भी अधिक की अवधि बीत चुकी है, इस परिपत्र के अन्य प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुए मूल पट्टा की अवसान तिथि को तीस वर्ष के लिये कल्पित नवीनीकरण मान्य करते हुए तद्क्रम में आगमी तीस वर्ष के लिये पट्टे का नवीनीकरण किया जाएगा। शर्त उल्लंघन के प्रकरणों में शमन राशि जमा किए जाने की सूचना देने के एक माह के अंदर शमन राशि जमा करना होगा एवं प्रकरण के निराकरण के बाद एक माह के अंदर नवीन पट्टा तैयार कर विधिवत पंजीयन कराना होगा। पट्टा नवीनीकरण के प्रकरणों के निराकरण के लिए 6 माह की समय-सीमा का निर्धारण किया गया है। |
Thursday, May 24, 2018
नजूल पट्टे का बकाया शेष नहीं होने पर 30 वर्ष के लिए होगा नवीनीकरण
अंतरनिकाय संविलियन अनुमति प्राप्त अध्यापकों की पद-स्थापना 31 मई तक
| अंतरनिकाय संविलियन अनुमति प्राप्त अध्यापकों की पद-स्थापना 31 मई तक |
| आयुक्त लोक शिक्षण ने जिला शिक्षाधिकारियों को दिये निर्देश |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों को हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में अध्यापक संवर्ग में अंतरनिकाय संविलियन की कार्यवाही 31 मई तक किये जाने का निर्देश दिया गया है। आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत ने यह आदेश जारी किये हैं।
आदेश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित शैक्षणिक शालाओं के लिये अनुमति प्राप्त अध्यापकों की पद-स्थापना संबंधी कार्यवाही 24 से 31 मई तक अनिवार्य रूप से की जाये। अध्यापकों की कार्यमुक्ति की कार्यवाही एक से 8 जून तक अनिवार्य रूप से किये जाने के लिये कहा गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पूर्व में हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बीच शैक्षणिक सत्र को देखते हुए अध्यापक संवर्ग के अंतरनिकाय संविलियन के लिये जारी अनुमति पर कार्यमुक्त नहीं किये जाने के निर्देश जारी किये थे। अब जून के दूसरे सप्ताह से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र को देखते हुए यह कार्यवाही निश्चित समय-सीमा में किये जाने के लिये कहा गया है। यह कार्यवाही आदिवासी क्षेत्र से गैर-आदिवासी, गैर-आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी क्षेत्र और आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी क्षेत्र की शालाओं को छोड़कर किये जाने के लिये कहा गया है। |
तीन हजार से अधिक बंद नलजल योजनाएँ पुन: चालू हुई
| तीन हजार से अधिक बंद नलजल योजनाएँ पुन: चालू हुई |
| अनुपपुर | 24-मई-2018 |
मध्यप्रदेश में बंद नलजल योजनाओं को नल से जल, आज और कल कार्यक्रम में चालू करवाया जा रहा है। तीन हजार से अधिक नलजल योजनाओं को चालू करवाया गया। दो लाख रुपये से कम लागत से सुधार वाली बंद नलजल योजनाओं को चालू करवाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को धनराशि उपलब्ध करवाई जा रही है। दो लाख रुपये से अधिक सुधार लागत वाली बंद नलजल योजनाओं को चालू करवाने संबंधी कार्यो की स्वीकृति देकर निविदाएँ आमन्त्रित करने की कार्यवाही पीएचई विभाग द्वारा की जा रही है।
राज्य शासन द्वारा बंद नलजल योजनाओं को शीघ्र चालू करवाने के लिए प्राक्कलन और स्वीकृत करने के अधिकार संबंधित जिला स्तरीय समिति को प्रत्याजित किये गये है। इसके बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा 4,332 नलजल योजनाओं के सुधार कार्य के प्राक्कलन स्वीकृत किये गये। इनमें से 2840 योजनाओं के कार्य पंचायतों के माध्यम से किये जा रहे हैं। इनमें से 2507 नलजल योजनाएँ विगत मार्च तक पुन: चालू कर दी गई हैं। पीएचई विभाग के माध्यम से कुल 1492 बंद योजनाओं को चालू करवाने के कार्य स्वीकृत किये गये थे। इनमें से 980 योजनाओं के कार्य पिछले मार्च माह तक पूरे हो चुके हैं। |
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