| शिक्षा आत्म-निर्भर और उद्यमी बनाने का माध्यम - राष्ट्रपति श्री कोविन्द |
| प्रत्येक विश्वविद्यालय में होगा दीक्षांत समारोह |
| अनुपपुर | 30-अप्रैल-2018 |
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने कहा है कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन और नौकरी पाने का साधन मात्र नहीं है, इससे विद्यार्थी आत्म-निर्भर और उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के स्रोत के रूप में है। इसलिये शिक्षा समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। राष्ट्रपति श्री कोविन्द आज सागर में डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के 27वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राष्ट्रपति श्री कोविन्द ने कहा कि आज चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों से ओतप्रोत शिक्षा पद्धति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रसार के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर बेहतर काम कर रहीं हैं। युवा आधुनिक शिक्षा पद्धति से शिक्षित और दीक्षित होकर अब नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें। उन्होंने बुंदेलखंड अंचल के पुरा वैभव, कला, संस्कृति, विश्व-प्रसिद्ध विरासतों और लाखा बंजारा और वीरांगना झलकारी बाई का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का गौरवमयी इतिहास रहा है। समाज के निर्माण में सागर विश्वविद्यालय का योगदान और डॉ. हरिसिंह गौर की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता अनुकरणीय है। उन्होंने लोक हित में निजी संपत्ति लगाने का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। यह विश्वविद्यालय सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण का स्रोत है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि डॉ. गौर के सपनों के अनुरूप विश्वविद्यालय का निरंतर विकास हो। राष्ट्रपति श्री कोविंद ने सागर विश्वविद्यालय में सामाजिक दर्शन पर शोध के लिये डॉ. अम्बेडकर पीठ की स्थापना और युवाओं को मार्गददर्शन देने के लिये उद्यमिता प्रकोष्ठ की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर कमजोर वर्गों के उत्थान और शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। वे कमजोर वर्गों के लिये शिक्षा को अनिवार्य मानते थे। श्री कोविंद ने कहा कि शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में बेटियों के बढ़ते वर्चस्व को एक अच्छे सामाजिक परिवर्तन के रूप में देखता हूँ। उन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा के प्रसार के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उठाये गये कदमों की सराहना की। उन्होंने राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के कार्यों का उल्लेख करते हुए बेटियों को आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित भी किया। साथ ही उपाधि हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई और शुभकामनाएँ दी। राष्ट्रपति ने आँतों के कैंसर के इलाज पर शोध के लिये विश्वविद्यालय के प्रो. संजय के. जैन को विशेष पुरस्कार मिलने पर उन्हें बधाई दी। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थी विद्या प्राप्ति को सिर्फ नौकरी पाने का माध्यम नहीं समझें। वे ज्ञान-अर्जन कर तेजस्वी और ओजस्वी बनें तथा अपने अर्जित ज्ञान का उपयोग सार्थक कार्यों में करते हुए समाज की उत्तरोत्तर प्रगति में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करना बच्चों का बुनियादी अधिकार है। इसके लिए हमने ठोस योजनाएँ बनाई हैं, जिससे धन के अभाव में कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कक्षा 12वीं में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संपूर्ण शिक्षा का खर्च शासन उठायेगा। साथ ही असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों की कक्षा पहली से पीएचडी तक की शिक्षा का खर्च भी शासन उठायेगा। श्री चौहान ने कहा कि 67 वर्ष बाद आज पहली बार भारत के राष्ट्रपति सागर आये हैं। उन्होंने कहा कि यह हम सबके लिये बहुत ही हर्ष का पल है। हमें इसी प्रकार अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहिए। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि अब देश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष दीक्षांत समारोह होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा कभी भी खत्म नहीं होती। हमें हर पल सीखते हुए पूर्ण समर्पण से जीवन में उच्चतम लक्ष्य प्राप्त करना चाहिए। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. बलवंत शांतिलाल जानी ने भी समारोह को संबोधित किया। कुलपति डॉ. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। दीक्षांत समारोह में 356 विद्यार्थियों को उपाधि से विभूषित किया गया। विश्वविद्यालय की अध्ययन शालाओं के टॉपर रहे विद्यार्थियों को स्वर्ण-पदक प्रदान किये गये। स्वर्ण पदक विजेता 11 विद्यार्थियों में 10 छात्राएँ थीं। इस अवसर पर केन्द्रीय महिला-बाल विकास एवं अल्पसंख्यक मामले राज्य मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव, कुलसचिव ग्रुप कैप्टन (रिटायर्ड) श्री विवेक दुबे उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह में विद्यार्थी एवं प्राध्यापक तथा सभी अतिथि भारतीय वेशभूषा में उपस्थित थे। शोभा यात्रा का दीक्षांत समारोह में आगमन पर वैदिक मंत्रोच्चार से स्वागत किया गया। |
Monday, April 30, 2018
शिक्षा आत्म-निर्भर और उद्यमी बनाने का माध्यम - राष्ट्रपति श्री कोविन्द
आयुष्मान भारत दिवस पर आयोजित विशेष ग्राम-सभाओं में चिन्हित परिवारों का किया गया नाम वाचन
अनूपपुर 30 अप्रैल 2018/ ग्राम स्वराज अभियान अंतर्गत
अनूपपुर मे 30 अप्रैल को आयुष्मान भारत
दिवस पर ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम-सभाओं का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं
स्वस्थ्य अधिकारी डॉ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम-सभाओं में प्रधानमंत्री
राष्ट्रीय चिकित्सा सुरक्षा मिशन के अंतर्गत 5 लाख रूपये तक के कैशलेस इलाज के
लिये चयनित नामों का वाचन किया गया। आपने बताया कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार
कल्याण विभाग ने सामाजिक एवं आर्थिक जनगणना-2011 में चिन्हित गरीब परिवारों की
सूची ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करा दी है। ग्राम-सभाओं में योजना का लाभ दिलाने के
लिए आधार, राशन कार्ड, बढ़े
हुए सदस्यों की संख्या आदि की भी जानकारी जुटाई जाएगी। आयुष्मान भारत योजना में 13
से अधिक पैकेज शामिल किए जा रहे हैं। चिन्हित हितग्राही शासकीय के साथ निजी
अस्पतालों में भी इलाज करा सकेंगे। उपचार राशि सीधे अस्पताल के खाते में पहुँच
जाएगी। योजना का दायरा काफी विस्तृत है। इसमें शहरी क्षेत्र के कचरा बीनने वाले
भिखारी, असंगठित क्षेत्र के मजदूर आदि को शामिल किया गया
हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भूमि होने, कच्चा मकान,
मजदूर आदि लाभ लेंगे। दिव्यांग वयस्क या पुरूष विहीन मुखिया परिवार भी
इस योजना में लाभान्वित होंगे।
जल संरक्षण एवं संवर्धन पर जल संसद मे बनाई गयी कार्ययोजना
जल संरक्षण
एवं संवर्धन पर जल संसद मे बनाई गयी कार्ययोजना
अनूपपुर 30 अप्रैल 2018/ जल प्रकृति द्वारा निः शुल्क
प्रदान किया गया है। परंतु इसकी मात्रा सीमित है। गैर जिम्मेदाराना ढंग से इस्तेमाल
करने से न केवल जल की उपलब्धता कम हुई है वरन जल मे प्रदूषण के कारण जल की स्वच्छता
पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जल के इस विकृत उपयोग से प्राकृतिक स्त्रोतों की जल
प्रदाय की क्षमता मे भारी कमी आई है। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने से भी जल
के प्रमुख स्त्रोत वर्षा की विश्वसनीयता मे परिवर्तन आने के फलस्वरूप अब यह आवश्यक
हो गया है कि जल का उचित प्रबंधन किया जाए। उक्त समस्याओं के प्रति समाज के ध्यानाकर्षण
एवं भविष्योनुमुखी रणनीति बनाने हेतु आज सम्पूर्ण प्रदेश मे जल संसद का आयोजन किया
गया।
जल के
संरक्षण की सर्वाधिक ज़िम्मेदारी मानव जाति की- डॉ आर पी तिवारी
अनूपपुर मे आयोजित जल संसद मे अपर कलेक्टर डॉ आरपी
तिवारी ने कहा कि जल के उचित प्रबंधन के बिना भविष्य मे जल की उपलब्धता की कल्पना नहीं
की जा सकती है। जल सभी प्राणियों के जीवन का आवश्यक अंग है। परंतु इसका उपयोग सर्वाधिक
मानव जाति द्वारा किया जाता है। अतएव इसके
संरक्षण एवं संवर्धन की सर्वाधिक ज़िम्मेदारी भी हमारी बनती है। इसी ज़िम्मेदारी की अनुभूति
कराने एवं जन सहयोग से इस प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा, उचित
प्रयोग, बेहतर प्रबंधन एवं संवर्धन के कार्य को निष्पादित कराने
हेतु जन अभियान परिषद अनवरत रूप से लगी हुई है। इस कार्य को वास्तविकता मे सफल बनाने
हेतु सम्पूर्ण समुदाय का सहयोग अवश्यक है। आज समय है हम सभी अपनी जिम्मेदारियों का
निर्वहन कर विकास की इस प्रक्रिया को सतत एवं संवहनीय बनाए।
जन भागीदारी
सुनिश्चित करने के लिए सहभागिता आवश्यक है- वीरेंद्र सिंह
ज़िला जन अभियान समिति के उपाध्यक्ष्य श्री वीरेंद्र
सिंह ने कहा कि जन भागीदारी ही प्राकृतिक संसाधनो के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सर्वोत्तम
उपाय है। सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लोग इस प्रक्रिया का
सम्पूर्ण रूप से हिस्सा बने। अपनी बाते रखे, उपाय साझा करे, कार्ययोजना के निर्माण एवं उसके क्रियान्वयन की रणनीति बनाने मे भागीदार हों।
इन सभी बातों को ध्यान मे रखते हुए आज सम्पूर्ण मध्यप्रदेश मे जल संसद का आयोजन किया
गया है।

जन अभियान परिषद के ज़िला समन्वयक श्री उमेश पांडे
ने बताया कि अनूपपुर ज़िले मे चारों विकासखंडों मे जनता को जल के महत्व के प्रति पुनःजागरण, सुझावों एवं उनके क्रियान्वयन मे भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आज जल संसद का आयोजन किया गया है।
जल संसदों मे अनूपपुर विकासखंड में बांकी नदी, जैतहरी
विकासखंड में हँसिया नदी,
पुष्पराजगढ़ विकासखंड में देवराज कोतमा
विकासखंड में कनई नदी
के पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण के लिए कार्ययोजना एवं
आगामी मई एवं जून माह मे उसके क्रियान्वयन पर चर्चा की गयी।
जन अभियान परिषद जल अभियान परिषद बनकर कर रहा है सराहनीय कार्य- मनोज द्विवेदी
ज़िला स्तरीय जल संसद मे उपस्थित जनो द्वारा नदी जल के बेहतर प्रबंधन, संवर्धन एवं संरक्षण हेतु योजना निर्माण एवं उनके क्रियान्वयन के लिए सुझाव दिये गए। अनूपपुर ज़िले के वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज द्विवेदी का कहना है नदी संरक्षण के साथ तालाब संरक्षण भी जरुरी है । आपने कहा इल लीगल माईनिंग से ज्यादा खतरनाक है इल लीगल वाटरिंग। बेवजह जरुरत से ज्यादा पानी का उपयोग करने से न केवल पानी का अपव्यय होता है वरन मृदा की उर्वरा शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है। अतिक्रमण की वजह से तालाब व नदी का कैचमेन्ट एरिया सिकुडा है। अतिक्रमण रोकने की जरुरत है। आज जल स्तर बढ़ाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिंस्टम पर कार्य करने की जरुरत है।नदियों को बचाने के लिये अंधाधुंध रेत उत्खनन रोकने व पौधे लगाने की जरुरत है, आपने कहा जन अभियान परिषद जल अभियान परिषद बन कर सराहनीय कार्य कर रहा है।
राज्यस्तरीय
जल संसद मे मुख्यमंत्री जी के सम्बोधन को अनूपपुर की जल संसदों मे सुना गया
अनूपपुर मे आयोजित जल संसदों मे मुख्यमंत्री श्री
शिवराज सिंह चौहान के भोपाल मे राज्यस्तरीय कार्यक्रम मे सम्बोधन के श्रवण एवं दर्शन
की व्यवस्था की गयी थी। जिसे सुनकर उपस्थित जन समुदाय ने जल संरक्षण के प्रति मुख्यमंत्री
श्री चौहान के द्वारा किए गए आह्वान को सुना एवं प्रकृति के प्रति अपना कर्तव्य निभाने
का प्रण लिया। अनूपपुर मे आयोजित ज़िला स्तरीय कार्यक्रम मे बाल विकास समिति के सदस्य
श्री ज्ञानेन्द्र सिंह, ग्राम प्रस्फुटन समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, पत्रकार बंधु एवं आम जन उपस्थित थे।
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